अजित फाउंडेशन के मासिक संवाद में जुटेगा बुद्धिजीवियों का जमावड़ा
अजित फाउंडेशन के मासिक संवाद में जुटेगा बुद्धिजीवियों का जमावड़ा



- अतीत की गूंज: भारतीय उपमहाद्वीप की भौतिक संस्कृति’ विषय पर 27 जून को होगा विशेष व्याख्यान
बीकानेर, 25 जून । कला, संस्कृति और वैचारिक चेतना को समर्पित स्थानीय संस्था ‘अजित फाउंडेशन’ की प्रतिष्ठित मासिक संवाद श्रृंखला के तहत इस बार एक बेहद अनूठे और ज्ञानवर्धक विषय पर चर्चा का आयोजन होने जा रहा है। फाउंडेशन के तत्वावधान में आगामी शनिवार को ‘अतीत की गूंज: भारतीय उपमहाद्वीप की भौतिक संस्कृति’ (Material Culture of the Indian Subcontinent) विषय पर एक गहन संवाद सत्र आयोजित किया जाएगा। इस बौद्धिक परिचर्चा में देश और राजस्थान के इतिहास, कला एवं संस्कृति से जुड़े कई ख्यातनाम विद्वान अपने विचार साझा करेंगे।


कार्यक्रम समन्वयक संजय श्रीमाली द्वारा मीडिया को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह संवाद कार्यक्रम दिनांक 27 जून 2026, शनिवार को सायं 5:30 बजे से बीकानेर स्थित अजित फाउंडेशन संस्था के मुख्य सभागार में प्रारंभ होगा। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए मुख्य वक्ता के रूप में राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी एवं प्रख्यात इतिहासवेत्ता डॉ. नितिन गोयल उपस्थित रहेंगे। सत्र की विशिष्टता यह होगी कि डॉ. नितिन गोयल अपने मुख्य व्याख्यान के तहत सुप्रसिद्ध इतिहासकार सुदेशना गुहा द्वारा लिखित बहुचर्चित पुस्तक ‘‘ए हिस्ट्री ऑफ इण्डिया थ्रू 75 ऑब्जेक्ट्स’’ (A History of India through 75 Objects) को केंद्र (थीम) में रखते हुए भारतीय उपमहाद्वीप के गौरवशाली अतीत, उसकी भौतिक संपदा और ऐतिहासिक अवशेषों के सफर पर अपनी बात रखेंगे।


शिक्षाविद् डॉ. अशोक शर्मा करेंगे अध्यक्षता, वरिष्ठ चित्रकार डॉ. राकेश किराडू होंगे मुख्य अतिथि
सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के इस गरिमामय संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता बीकानेर शिक्षा निदेशालय के सहायक निदेशक, स्टाफ ऑफिसर तथा प्रखर शिक्षाविद् डॉ. अशोक शर्मा करेंगे। वहीं, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय (MGSU) के ड्राइंग एंड पेंटिंग विभाग के व्याख्याता व जाने-माने वरिष्ठ चित्रकार डॉ. राकेश किराडू शिरकत करेंगे। संस्था प्रबंधन ने बीकानेर के प्रबुद्ध नागरिकों, साहित्यकारों, इतिहासकारों, शोधार्थियों तथा कला-संस्कृति प्रेमियों से इस बौद्धिक संवाद में समय पर पधार कर परिचर्चा को समृद्ध बनाने का आग्रह किया है।


