बीकानेर के नगरसेठ श्री लक्ष्मीनाथ जी दरबार में ‘सनातन सेवा महादिवस’ की धूम

बीकानेर के नगरसेठ श्री लक्ष्मीनाथ जी दरबार में 'सनातन सेवा महादिवस' की धूम
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026
  • चार बजे पंचामृत अभिषेक के साथ लगा आम-सेंवइयों का महाभोग, 351 मंदिरों में पूजे गए ठाकुर जी, नौनिहालों को बांटी ‘पाटी-पोथी-कलम’

बीकानेर, 25 जून । निर्जला एकादशी के पावन पर्व पर भारतीय संस्कृति एवं सनातन सार्वभौम महासभा, सनातन सेवा ग्रुप तथा श्री विप्र महासभा के संयुक्त तत्वावधान में बीकानेर के नगरसेठ श्री लक्ष्मीनाथ जी महाराज के मंदिर में भव्य और दिव्य “सनातन सेवा महादिवस अनुष्ठान” का आयोजन किया गया। 43वें पूजन अनुष्ठान के मुख्य साधक, भारतीय संस्कृति एवं सनातन सार्वभौम महासभा के अध्यक्ष तथा श्री विप्र महासभा के राष्ट्रीय संयोजक पंडित योगेन्द्र कुमार दाधीच की अगुवाई में आयोजित इस विशेष धार्मिक महोत्सव को राष्ट्रीय संत स्वामी श्री सरजू दास जी महाराज का दिव्य सानिध्य प्राप्त हुआ। इस पावन अवसर पर समूचा मंदिर परिसर सनातन के गगनभेदी जयकारों और ठाकुर जी की भक्ति से सराबोर नजर आया।

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उत्सव की शुरुआत अलसुबह ठीक चार बजे नगरसेठ श्री लक्ष्मीनाथ जी के पंचामृत अभिषेक के साथ हुई। मंदिर के मुख्य पुजारी गौरी शंकर सेवग, सौरभ, अरविंद, शिव शंकर भोजक, शुभम सेवग, बुलाकी सेवग एवं नवरतन सेवग आदि पुजारीगण ने मंत्रोच्चार के बीच ठाकुर जी का पंचामृत से महाअभिषेक संपन्न कराया। इसके पश्चात भगवान को नवीन रेशमी वस्त्र (पोशाक) धारण करवाकर मनमोहक पुष्प मालाओं से अलौकिक श्रृंगार किया गया। इससे पूर्व, मुख्य साधक पंडित योगेन्द्र कुमार दाधीच द्वारा नवीन वस्त्र, पंचामृत सामग्री, पुष्प मालाएं तथा विशेष भोग सामग्री मंदिर के पुजारियों को सुपुर्द की गई। ठाकुर जी को तुलसी दल के साथ भगवान विष्णु के दस अवतारों की विशेष झांकी सजाकर आम (मैंगो) और पारंपरिक सेंवइयों का महाभोग अर्पित किया गया, जिसे दिनभर श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप वितरित किया गया।

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पांच प्रकार के शरबत की सेवा और विद्यार्थियों को सरस्वती मां का आशीर्वाद
भीषण गर्मी को देखते हुए सेवा ग्रुप की ओर से दर्शनार्थियों के लिए दिनभर ठंडे जल के साथ-साथ गुलाब, ऑरेंज, केसर, बेला और खसखस के पांच विभिन्न स्वादों (फ्लेवर) के शीतल शरबत की अटूट छबील लगाई गई। इसके साथ ही, इस दिव्य अनुष्ठान के अंतर्गत शिक्षा और संस्कारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुभ मुहूर्त में नौनिहालों और अध्ययनरत विद्यार्थियों को पूजित माता सरस्वती जी की सुंदर तस्वीर के साथ पाटी (स्लेट), पोथी (पुस्तक) एवं कलम (पेन) का निःशुल्क वितरण किया गया। विद्यार्थियों ने इसे माता सरस्वती के परम आशीर्वाद के रूप में ग्रहण किया। इस सेवा कार्य में रामप्रसाद मिश्रा, देवकिशन गहलोत, सूरज दरगड़, प्रवीण दाधीच, लीलाधर आसोपा, मदनलाल पुरोहित, काका श्याम आचार्य, शिवप्रकाश व्यास, सुरेन्द्र जोशी, श्यामसिंह चारण, नवल कल्ला, बंसीलाल व्यास, रवि कलवानी, राकेश आसोपा, शंकरलाल जोशी, राजेश शर्मा, रवि नाई, अशोक सोनी, सतीस तिवाड़ी, दिनेश काकड़ा, कैलाश आसोपा तथा दयानिधि तिवाड़ी सहित अनेक प्रबुद्धजनों ने सक्रिय भागीदारी निभाकर अपनी सेवाएं दीं।

संतों के सानिध्य में लिया 5 बिंदुओं का राष्ट्रीय व सनातन संकल्प
इस पावन दिवस पर एक विशेष ‘संकल्प एवं शपथ अनुष्ठान’ का आयोजन भी किया गया, जिसका शुभारंभ राष्ट्रीय संत स्वामी श्री सरजू दास जी महाराज ने विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री और मां सरस्वती की तस्वीर भेंट करके किया। इसके पश्चात, दिनभर मंदिर परिसर में आमजन और युवाओं ने राष्ट्र निर्माण तथा सनातन सेवा में अपना सक्रिय योगदान देने के उद्देश्य से तैयार किए गए विशेष ‘पांच बिंदुओं के शपथ पत्र’ को पढ़कर ईश्वर के सम्मुख जीवन में सेवा पथ पर चलने का दृढ़ संकल्प लिया।

प्रदेशभर के 351 मंदिरों में गूंजे जयकारे, गो-सेवा और रैन बसेरों में बंटा फलाहार
संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि यह महादिवस अनुष्ठान केवल बीकानेर तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि राजस्थान प्रदेश भर के विभिन्न जिला मुख्यालयों और प्रमुख आराध्य मंदिरों में क्षेत्रीय प्रभारियों व आयोजन समितियों के माध्यम से व्यापक स्तर पर आयोजित किया गया। निर्जला एकादशी पर राज्य के कुल 351 प्रमुख मंदिरों में पुजारियों के सानिध्य में महाभोग, विशेष महाआरती और महाप्रसाद वितरण का यह सिलसिला अनवरत रूप से चलता रहा।

इसके अतिरिक्त, पांच दिवसीय अनुष्ठान के तहत धनीनाथ गिरि मठ पंच मंदिर में स्वामी श्री मोहन दास जी महाराज के पावन सानिध्य एवं पंडित योगेन्द्र कुमार दाधीच की गरिमामय उपस्थिति में विशेष पूजन, धार्मिक प्रवचन एवं सत्संग का आयोजन हुआ। इस दौरान वेदशास्त्री पंडित प्रकाश शर्मा, पुजारी शिव शंकर सेवग, भवानी सेवग, रामचंद्र पंजाबी, पीयूष सोनी, प्रवीण दाधीच, संजय सोनी, सोनू बाई, सरस्वती देवी, बसंती देवी, उर्मिला देवी, पाना देवी और संपत दायमा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जीव दया के संकल्प के साथ स्थानीय गोशालाओं में गायों के लिए हरा चारा, गुड़ और शीतल जल की उत्तम व्यवस्था की गई। साथ ही, बीकानेर के कोटगेट स्थित रैन बसेरा में पिछले 20 से अधिक वर्षों से अनवरत चली आ रही परंपरा को निभाते हुए असहाय व जरूरतमंद लोगों को फलाहार तथा ताजा आमरस की विशेष सेवाएं प्रदान कर पुण्य लाभ कमाया गया।

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