सड़कों की सफाई बंद, घरों में है 800 टन कचरा, नहीं टूटी हड़ताल तो बढ़ेगी समस्या

वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मचारी आंदोलन पर
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वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मचारी आंदोलन पर

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बीकानेर , 31 जुलाई। सफाई कर्मचारी भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर कई दिनों से वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मचारी आंदोलन पर हैं। कर्मचारियों ने सफाई का काम, बंद कर दिया है। इससे पूरा शहर कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है। जगह-जगह कचरा सड़ रहा है। मक्की-मच्छर पनर पहे। ऊपर से बारिश का सीजन तो मौसमी बीमारियों का खतरा है। फिर भी लोग वाल्मीकि समाज के साथ हैं। दो दिन से टिपर और ट्रैक्टर को जबरदस्ती कचरा उठाने से रोका जा रहा है। इससे घरों में ही करीब 800 टन कचरा जमा हो गया।

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दरअसल पिछली सरकार ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती निकाली थी। उसी समय आवेदन जमा हो गए थे। पिछली ही सरकार ने पद भी बढ़ा दिए। नई सरकार आई तो भर्ती का दबाव बना। आवेदन पहले से जमा थे इसलिए आंदोलन शुरू कर दिया। एक दिन सभी ने सामूहिक अवकाश लिया। एक दिन सामूहिक कार्य बहिष्कार किया। यानी डयूटी पर तो आए पर सफाई नहीं की। सोमवार को भी यही सिस्टम रहा।

दिक्कत आरक्षण नियमों की है

वाल्मीकि समाज की मांग मानने में संवैधानिक समस्या है। कोई भी सरकारी भर्ती होगी उसमें संविधान के अनुसार सभी वर्गों का आरक्षण तय है। कानून के जानकार कहते हैं कि आरक्षण प्रक्रिया को तोड़ना सरकार के भी अधिकार क्षेत्र में नहीं। अगर कोई छूट दी तो उसे न्यायालय में चुनौती मिलेगी। इससे पूरी भर्ती प्रक्रिया ही अटक जाएगी। अब सरकार के सामने संकट है कि आंदोलन कैसे खत्म हो।

1000 पदों में सिर्फ 210 पद आरक्षित वाल्मीकि समाज का तर्क है कि नालों में उतरकर सफाई करनी हो या सीवरेज में। शहर की पूरी गंदगी हमारा ही समाज उठाता है। ऐसे में क्यों नहीं इस भर्ती में उन्हें ही तवज्जो दी जाए। बीकानेर में 1000 पदों पर होने वाली भर्ती में एससी वर्ग के लिए 210 पद आरक्षित हैं। 790 पद दूसरे वर्गों के लिए हैं। पर दूसरे वर्ग सफाई का काम करते नहीं। आरक्षितों में भी मेघवाल, नायक समेत तमाम जातियां हैं जो हमारे ही वर्ग से कुछ पैसे देकर उसने सफाई कराते हैं।

ये गलत बात है : हड़ताल करिए पर कचरा तो उठाने दीजिए, वर्ना फैलेगी बीमारी

लगातार कई दिनों से सफाई ना होने के कारण अब शहर सड़ने लगा। बाजारों में कूड़े का ढेर लगा है। सब्जी मंडियों में मक्खियां भिनभिनाने लगीं। गलियों में जगह-जगह कचरा पसरा है। फिर भी लोग वाल्मीकि समाज की मांग के साथ साहानुभूति बरत रहे हैं क्योंकि सभी जानते हैं कि सफाई का काम यही वर्ग करता है।

दो दिन से सफाई कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को प्रभावी बनाने के लिए टिपर और ट्रैक्टरों को भी कचरा उठाने से रोक दिया, जबकि टिपर में सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। यही कारण है कि दो दिन से टिपर शहर में दिखाई नहीं दे रहे। एक दिन में पूरे शहर से टिपर करीब 350 टन और रविवार को छुट्‌टी के बाद सोमवार को 400 से 450 टन कचरा हो जाता है। यानी सोमवार तक घरों का करीब 800 टन कचरा नहीं उठाया गया। इसलिए अब समस्या घरों में होने लगी।

 

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