बीकानेर राजपरिवार का झगड़ा बुआ राज्यश्री बोलीं-सिद्धि ने हमें रोकने के लिए बाउंसर लगाए

बीकानेर राजपरिवार का झगड़ा बुआ राज्यश्री बोलीं-सिद्धि ने हमें रोकने के लिए बाउंसर लगाए
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quicjZaps 15 sept 2025
  • जूनागढ़ के अंदर जाने से रोकना चाहती हैं, ट्रस्ट पर देवस्थान विभाग ने दिया नया फैसला

बीकानेर , 1 जनवरी। बीकानेर के पूर्व राजघराने के बीच चल रहा संपत्ति विवाद गहरा गया है। बीकानेर पूर्व की विधायक और परिवार की सदस्य सिद्धि कुमारी पर उनकी बुआ राज्यश्री कुमारी ने आरोप लगाते हुए कहा कि हमें रोकने के लिए सिद्धि कुमारी ने पारिवारिक संपत्ति जूनागढ़ और लालगढ़ के आगे बाउंसर खड़े कर दिए हैं, ताकि हम अंदर नहीं जा सकें।

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राज्यश्री कुमारी ने कहा कि जब से मेरी माता सुशीला देवी का निधन हुआ है, तब से सिद्धि कुमारी मुझे परेशान कर रही हैं। मेरे खिलाफ पुलिस थानों में झूठे मामले तक दर्ज करा दिए। जूनियर स्टाफ के खिलाफ भी मामले दर्ज करा दिए।

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इधर, बीकानेर के पूर्व राजघराने के संपत्ति विवाद को लेकर बीकानेर पूर्व की विधायक सिद्धि कुमारी को बड़ा झटका लगा है। कुछ समय पहले देवस्थान विभाग ने आदेश दिया था कि बीकानेर के पूर्व राजपरिवार के पांच ट्रस्टों की ट्रस्टी सिद्धि कुमारी है। इस आदेश के खिलाफ अपील के बाद विभाग ने अपना फैसला बदल दिया है।

देवस्थान विभाग के नए आदेश के तहत राज्यश्री कुमारी, मधुलिका कुमारी, हनुवंत सिंह को ट्रस्टी मान लिया गया है। ये फैसला मुंबई हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए दिया गया है। राज्यश्री अब ट्रस्ट के अधीन आए जूनागढ़, लालगढ़ सहित अन्य संपत्तियों पर दौरा कर सकती हैं। राज्यश्री ने कहा- मैं किसी भी विवाद से बचना चाहती हूं। मुझे राजपरिवार की इज्जत रखनी है।

मीडिया से बातचीत के दौरान जब राज्यश्री से पूछा गया कि जूनागढ़ फोर्ट के बाहर बाउंसर्स बैठाए गए हैं, तो उन्होंने कहा- यह गलत है, बिलकुल गलत है। ये प्रशासन वो मान रहा है जो वो (सिद्धि कुमारी और अन्य) लोग कह रहे हैं। पुलिस का गलत दुरुपयोग हो रहा है। ये पुलिस का यूज है, उन लोगों के खिलाफ जो नॉन पोलिटिकल हैं। ये पॉलिटिकल पावर का दुरुपयोग है।

देवस्थान विभाग ने पहले राज्यश्री कुमारी को नहीं माना था ट्रस्टी

विधायक सिद्धि कुमारी ने राजपरिवार के संबंधित ट्रस्टों में राज्यश्री कुमारी, मुधलिका कुमारी, हनुवंत सिंह और रीमा हूजा को ट्रस्टी पद से हटा दिया था। इसके बाद अपने पक्ष के संजय शर्मा, धीरज भोजक, मनीष शर्मा, मदन सिंह को ट्रस्टी बनाया था। देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त ने 27 मई 2024 को इस पर मुहर लगा दी थी।

देवस्थान विभाग के आदेश में सिद्धि कुमारी को परिवार का वरिष्ठ सदस्य माना गया था और वर्किंग ट्रस्टी हनुवंत सिंह के हस्ताक्षर को फर्जी माना गया था। राजमाता सुशीला कुमारी (सिद्धि कुमारी की दादी) की वसीयत से पुराने ट्रस्टी को हटाकर नए ट्रस्टी स्वीकार कर लिए थे। इस आदेश के खिलाफ हनुवंत सिंह ने देवस्थान विभाग उदयपुर के आयुक्त के सामने अपील दायर की थी।

देवस्थान विभाग ने कोर्ट का हवाला देकर राज्यश्री कुमारी को ट्रस्टी माना

अब देवस्थान विभाग के आयुक्त वासुदेव मालावत ने मुंबई हाईकोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए पुराने आदेश को बदल दिया है। बदले फैसले में कहा- मुंबई हाईकोर्ट के फैसले में स्पष्ट है कि परिवार का वरिष्ठ सदस्य ही इन ट्रस्टों का सर्वेसर्वा होगा। वरिष्ठ सदस्य सिद्धि कुमारी नहीं बल्कि राज्यश्री कुमारी है। इस आधार पर राज्यश्री कुमारी, मुधलिका कुमारी, हनुवंत सिंह और रीमा हूजा को वापस ट्रस्टी मान लिया है।

हस्ताक्षर पर सवाल ?
राज्यश्री सहित अन्य ट्रस्टी पद से हटाने पर हनुवंत सिंह ने देवस्थान विभाग उदयपुर के आयुक्त के सामने अपील दायर की थी। तब देवस्थान विभाग ने आवेदन करने वाले हनुवंत सिंह के हस्ताक्षर को स्वीकार नहीं किया था। अब देवस्थान विभाग के आयुक्त ने अपने फैसले में साफ कहा कि अधीनस्थ ऑफिस ने तथ्य को इग्नोर करते हुए आदेश कर दिए, जो विधि विरुद्ध है। हनुवंत सिंह के हस्ताक्षर को अवैध क्यों माना, ये आधार ही सहायक आयुक्त के आदेश में नहीं है।

5 ट्रस्ट पर दोनों का अपना-अपना दावा
दरअसल, पूर्व राजघराने की बेशकीमती संपत्ति को लेकर राज्यश्री कुमारी (बुआ) और सिद्धि कुमारी (भतीजी) आमने-सामने हैं। दोनों के बीच परिवार के ट्रस्टों को लेकर भी विवाद है। महाराजा करणी सिंह (राज्यश्री कुमारी के पिता) के समय और इसके बाद कुछ ट्रस्ट महाराजा गंगा सिंह ट्रस्ट, महाराजा राय सिंह ट्रस्ट, करणी सिंह फाउंडेशन, करणी चैरिटेबल ट्रस्ट और महारानी सुशीला कुमारी ट्रस्ट का गठन किया गया था। इन पांचों ट्रस्ट को पहले करणी सिंह की बेटी राज्यश्री कुमारी ही देखती थीं।

पूर्व महाराजा करणी सिंह की पत्नी राजमाता सुशीला कुमारी के निधन के बाद बुआ-भतीजी के बीच विवाद बढ़ गया। इसके बाद देवस्थान विभाग के एक आदेश ने राजघराने के विवाद को बढ़ा दिया। इस आदेश में देवस्थान विभाग के उदयपुर मुख्यालय ने सिद्धि कुमारी को ट्रस्ट का अधिकार दे दिया। राज्यश्री ने इस आदेश को लेकर अदालत में केस दायर किया था। उधर, सिद्धि कुमारी ने पूरे ट्रस्ट को ही बदल दिया। अब सभी पांच ट्रस्ट विवादित हो गए हैं। इन ट्रस्टों पर राज्यश्री और सिद्धि कुमारी के अपने-अपने दावे हैं। दोनों ने अपने-अपने समर्थकों को इसमें शामिल किया है।

 

 

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