इतिहास मात्र तथ्यों का संग्रह नहीं, अतीत की घटनाओं का जीवंत दर्पण है; बिनानी कॉलेज में एनएसएस शिविर के चौथे दिन सेवा और कला का संगम


बीकानेर। बिनानी कन्या महाविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) के सात दिवसीय विशेष शिविर के चौथे दिन छात्रा स्वयंसेविकाओं ने समाज सेवा, स्वास्थ्य और ऐतिहासिक शोध की एक नई मिसाल पेश की। गुरुवार को आयोजित गतिविधियों में मुख्य आकर्षण ‘एक छात्रा-एक पौधा’ अभियान, कच्ची बस्ती में साक्षरता का संकल्प और इतिहास विभाग द्वारा आयोजित विशेष प्रदर्शनी रही।


श्रमदान और पर्यावरण संरक्षण: ‘एक छात्रा-एक पौधा’
रासेयो अधिकारी डॉ. अशोक व्यास के अनुसार, शिविर के प्रथम चरण में स्वयंसेविकाओं ने महाविद्यालय परिसर में सघन सफाई अभियान चलाकर श्रमदान किया। इसके पश्चात ‘एक छात्रा-एक पौधा’ की थीम पर गुलमोहर, अशोक, नीम और अमरूद जैसे छायादार एवं फलदार पौधे रोपे गए। प्रत्येक छात्रा ने अपने द्वारा लगाए गए पौधे की पूर्ण जिम्मेदारी लेने का संकल्प लिया।


योग और ध्यान: मानसिक शांति का मार्ग
शिविर के अगले चरण में ‘हार्टफुलनेस संस्थान’ के श्री ओमप्रकाश और आशु ने छात्राओं को मेडिटेशन एवं योग के महत्व से अवगत कराया। तीन दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन छात्राओं को प्राणायाम, अनुलोम-विलोम और श्वास नियंत्रण की तकनीकें सिखाई गईं। योग प्रशिक्षकों ने विभिन्न आसनों का अभ्यास कराते हुए छात्राओं को मानसिक एकाग्रता बढ़ाने के गुर सिखाए।
सामाजिक सरोकार: भाटों के बास में साक्षरता का संकल्प
डॉ. अनिता मोहे ने जानकारी दी कि छात्राओं ने महाविद्यालय द्वारा गोद ली गई बस्ती ‘भाटों के बास’ का दौरा किया। यहाँ स्वयंसेविकाओं ने निवासियों को खाद्य सामग्री और ऊनी वस्त्र वितरित किए। सबसे महत्वपूर्ण पहल के रूप में, आठ छात्राओं के एक समूह ने आगामी 26 जनवरी तक बस्ती के बच्चों, प्रौढ़ों और महिलाओं को साक्षर करने तथा स्वच्छता अभियान चलाने का बीड़ा उठाया है।
इतिहास प्रदर्शनी: अतीत से रूबरू हुईं छात्राएं
इतिहास विभाग की सहायक आचार्य मधु सोलंकी के निर्देशन में कला एवं इतिहास पर आधारित एक प्रभावशाली प्रदर्शनी लगाई गई। इसका उद्घाटन राजकीय डूंगर महाविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. बिन्दु भसीन, प्राच्य विद्या संस्थान के डॉ. नितिन गोयल और प्रबन्ध समिति सचिव गौरीशंकर व्यास ने किया।
व्याख्यानमाला में डॉ. बिन्दु भसीन ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास केवल जानकारियों का पुलिंदा नहीं है, बल्कि यह अतीत की घटनाओं के कारणों और उनके दूरगामी परिणामों का विश्लेषण है। डॉ. नितिन गोयल ने छात्राओं द्वारा बनाए गए ऐतिहासिक मॉडल्स की सराहना की और उन्हें राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। सचिव गौरीशंकर व्यास ने ऐसी प्रदर्शनियों को ज्ञान विस्तार का सशक्त माध्यम बताया।
कार्यक्रम का समापन प्राचार्या डॉ. अरुणा आचार्य के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. अशोक व्यास ने किया।








