रोहतक स्पेशल ओलंपिक में जैन समाज के बेटे ने रचा इतिहास, 200 मीटर दौड़ में जीता स्वर्ण पदक

रोहतक स्पेशल ओलंपिक में जैन समाज के बेटे ने रचा इतिहास
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रोहतक/बीकानेर, 8 फ़रवरी । हरियाणा के रोहतक में आयोजित हो रहे ‘स्पेशल ओलंपिक भारत’ में जैन समाज के लिए एक गौरवशाली अध्याय लिखा गया है। बीकानेर के एक विशेष खिलाड़ी (दिव्यांग) ने अपनी शारीरिक सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए 200 मीटर दौड़ में धीरज कुमार तातेड ने स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रच दिया है। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि धीरज कुमार तातेड जैन समाज के पहले ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं जिन्होंने मंदबुद्धि (Intellectual Disability) श्रेणी में इस स्तर पर सफलता प्राप्त की है।

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उल्लेखनीय है कि खिलाड़ी धीरज कुमार तातेड ने पैरा स्पोर्ट्स में पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। उनकी इस स्वर्णिम सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन मिले, तो कोई भी बाधा लक्ष्य के आड़े नहीं आ सकती।

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मार्गदर्शन और संस्थान की भूमिका
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे एसएमएस दिव्यांग सेवा संस्था पैरा स्पोर्ट्स, बीकानेर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। खिलाड़ी को इस मुकाम तक पहुँचाने में संस्था की अध्यक्ष मंजू गुलगुलिया और कोच नरेंद्र शर्मा का विशेष मार्गदर्शन सराहनीय रहा।

कोच नरेंद्र शर्मा ने बताया कि खिलाड़ी ने कड़े अभ्यास और अनुशासन के बल पर यह स्थान प्राप्त किया है। वहीं, मंजू गुलगुलिया ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह पदक केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि उन हजारों दिव्यांग बच्चों के लिए प्रेरणा है जो समाज की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं।

जैन समाज में खुशी की लहर
जैसे ही स्वर्ण पदक जीतने की सूचना बीकानेर पहुँची, जैन समाज और खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। सामाजिक संगठनों ने इसे समाज के लिए ‘ऐतिहासिक गौरव’ करार देते हुए खिलाड़ी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। यह सफलता विशेष बच्चों के प्रति समाज के नजरिए को बदलने और उन्हें खेल क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

 

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