आस्था का सैलाब- दादा गुरुदेव जिन कुशल सूरीश्वरजी की 693वीं पुण्यतिथि पर नाल दादाबाड़ी में उमड़ी श्रद्धा, भक्ति संगीत और बड़ी पूजा का आयोजन

आस्था का सैलाब: दादा गुरुदेव जिन कुशल सूरीश्वरजी की 693वीं पुण्यतिथि पर नाल दादाबाड़ी में उमड़ी श्रद्धा, भक्ति संगीत और बड़ी पूजा का आयोजन
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बीकानेर, 17 फरवरी। मरूधरा के महान संत और खरतरगच्छ के गौरव दादा गुरुदेव जिन कुशल सूरीश्वरजी महाराज की 693वीं पुण्यतिथि मंगलवार को बीकानेर के नाल स्थित दादाबाड़ी में पूरी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाई गई। श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के तत्वावधान और सकल श्रीसंघ के सहयोग से आयोजित इस विशाल मेले और बड़ी पूजा में बीकानेर संभाग के हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।

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पुण्यतिथि के पावन अवसर पर नाल दादाबाड़ी और भगवान पदमप्रभु के मंदिर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। गुरुदेव के पगलियों और परमात्मा की प्रतिमा पर विशेष आंगिक रचना और श्रृंगार किया गया, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा। सुबह ध्वजारोहण के साथ शुरू हुए कार्यक्रमों ने दोपहर तक भक्ति के शिखर को छू लिया।

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सुरों से सजी बड़ी पूजा: विभिन्न रागों में गूँजी गुरु-महिमा
श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष हरीश नाहटा ने बताया कि पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित ‘बड़ी पूजा’ में जल, केशर-चंदन, पुष्प, अक्षत, नैवेद्य, फल और वस्त्र-इत्र के साथ अर्घ्य चढ़ाए गए।

भक्ति संगीत: पूजा के दौरान विचक्षण महिला मंडल सहित अरिहंत नाहटा, कुशल बैद, कृणाल छाजेड़, ऋषभ कोठारी और मनीष पारख ने विभिन्न रागों और सुमधुर तर्जों पर भजनों की प्रस्तुतियां दीं।

श्रृंगार सेवा: ज्ञान वाटिका के बालक-बालिकाओं—अरिहंत नाहटा, दर्शन, साक्षी सेठिया, हर्षिता और भूमि जैन ने गुरुदेव के पगलियों की भव्य अंगी रचना की।

सकल श्रीसंघ की सहभागिता और सुव्यवस्थित आयोजन
इस धार्मिक समागम में श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के पूर्व अध्यक्ष निर्मल धारीवाल सहित खरतरगच्छ युवा परिषद, जिनेश्वर युवक परिषद और श्री सुगनजी महाराज उपासरा ट्रस्ट के पदाधिकारी सक्रिय रहे। गंगाशहर, भीनासर, उदासर, उदयरामसर और नाल क्षेत्र से आए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रन्यास द्वारा विशेष बसें चलाई गईं।

पूजा के पूर्व नवकार महामंत्र के सामूहिक जाप से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। मेले के दौरान सुरक्षा और दर्शन की सुव्यवस्थित व्यवस्था ने श्रद्धालुओं के अनुभव को सुखद बनाया। शाम को महाआरती के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें गुरुदेव की महिमा का गुणगान करते हुए विश्व शांति की मंगल कामना की गई।

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