नई शिक्षा नीति भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करने का जीवंत दस्तावेज- डॉ. मेघना शर्मा

नई शिक्षा नीति भारतीय परंपरा को पुनर्जीवित करने का जीवंत दस्तावेज- डॉ. मेघना शर्मा
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सरदारशहर/बीकानेर, 19 मार्च । सरदारशहर के कमलादेवी गौरीदत्त मित्तल महिला पीजी महाविद्यालय में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: भारतीय संस्कृति के संवर्धन की दिशा में एक पहल” विषय पर केंद्रित इस संगोष्ठी के दूसरे दिन मुख्य वक्ता के रूप में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (MGSU) के इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने अपना बीज वक्तव्य (Keynote Address) प्रस्तुत किया।

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आत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करेगी नई पद्धति
एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मेघना शर्मा ने अपने संबोधन में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ को शिक्षा जगत का एक क्रांतिकारी मोड़ बताया। उन्होंने कहा
“नवीन शिक्षा नीति केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की उस प्राचीन समग्र विकास की परंपरा को पुनर्जीवित करने का वृहद संकल्प है, जो समय के साथ ओझल हो गई थी। इस नई पद्धति से शिक्षित होने वाली पीढ़ी न केवल ज्ञानवान होगी, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को हकीकत में बदलने की ओर उन्मुख होगी।”

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प्राचीन ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता पर बल
इतिहास की विशेषज्ञ होने के नाते डॉ. मेघना ने प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणालियों और गौरवशाली इतिहास के उदाहरण प्रस्तुत किए। उन्होंने तर्क दिया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को वर्तमान पाठ्यक्रम में शामिल करना आज के समय की मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब विद्यार्थी अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़कर शिक्षा प्राप्त करेंगे, तभी उनमें वास्तविक शोध और नवाचार की प्रवृत्ति विकसित होगी।

शिक्षाविदों ने किया सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन और डॉ. मेघना का विस्तृत परिचय डॉ. रश्मि गौड़ द्वारा दिया गया। कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन के लिए संयोजक डॉ. मयंक गुप्ता, प्राचार्य डॉ. मृत्युंजय पारीक और प्रबंधन समिति के महेश पंसारी ने डॉ. मेघना शर्मा को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर मंच पर प्रो. योगेंद्र सिंह और डॉ. जी. डी. सिंह सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिक्षाविद् उपस्थित रहे।

 

sjps