परमात्मा की वाणी में ऐसी मिठास, जो पीड़ा भी भुला दे- साध्वी प्रीतिसुधा
परमात्मा की वाणी में ऐसी मिठास, जो पीड़ा भी भुला दे- साध्वी प्रीतिसुधा



बीकानेर , 29 सितम्बर। बीकानेर के रांगड़ी चौक स्थित पौषधशाला में तपागच्छीय गच्छाधिपति पद्मश्री आचार्य श्रीमद् विजय नित्यानंदसूरिश्वरजी महाराज की आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री प्रीतिरत्ना, साध्वीश्री प्रीतिसुधा एवं साध्वीश्री प्रीतियशा महाराजसा आदि ठाणा-3 की पावन निश्रा में मंगलवार को धर्मसभा का आयोजन किया गया।


धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वीश्री प्रीतिसुधा महाराज सा ने कहा कि परमात्मा की वाणी में ऐसी अद्भुत मिठास और प्रभाव होता है कि इसे श्रद्धा से सुनने वाला व्यक्ति अपने सांसारिक कष्ट और पीड़ा तक भूल जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारे भीतर परमात्मा को सुनने और उनकी भक्ति करने की उत्कंठा से ही प्रभु के प्रति हमारे प्रेम की गहराई का पता चलता है।


अपने प्रवचन के दौरान साध्वीश्री ने आचार्य हरिभद्रसूरिश्वरजी द्वारा वर्णित एक वृद्ध महिला का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि पेट भरने के लिए जंगल से लकड़ियां बीनने वाली एक अत्यंत वृद्ध महिला रास्ते में परमात्मा की देशना सुनकर इतनी तल्लीन हो गई कि झुकी हुई अवस्था में ही करीब तीन घंटे तक वाणी सुनती रही। उस दौरान उसे अपनी उम्र, शारीरिक कष्ट और पीड़ा का तनिक भी अहसास नहीं रहा। साध्वीश्री ने कहा कि परमात्मा की वाणी के प्रति ऐसी तल्लीनता ही सच्चे श्रवण का भाव दर्शाती है।
साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं को छोटे-छोटे मोह और लोभ से ऊपर उठकर मानवता, जीवदया तथा पशु-पक्षियों की सेवा में समर्पित होने का आह्वान किया। उन्होंने जैन समाज के पूर्वजों द्वारा जनकल्याण के क्षेत्र में स्थापित परंपराओं का स्मरण दिलाते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को भी इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए।
इसके अलावा, साध्वीश्री ने देवी-देवताओं की आराधना के दौरान परमात्मा को केंद्र में रखने की बात कही। उन्होंने बताया कि देवी-देवता भी परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं, इसलिए मुख्य आराधना प्रभु की ही होनी चाहिए।
चातुर्मास लाभार्थी परिवार के सुरेंद्र बद्धाणी ने जानकारी दी कि गुरु वल्लभ की पुण्यतिथि के अवसर पर श्रीसंघ के श्रावक-श्राविकाओं को अधिकाधिक आयंबिल आराधना से जुड़ने की प्रेरणा दी गई है। इसके तहत मंगलवार को चंदा कोचर तथा सोमवार को अंजलि कोचर ने क्रमिक आयंबिल किया। वहीं माणिकलाल-शांतिलाल सेठिया परिवार ने श्रीसंघ पूजा एवं प्रभावना का लाभ उठाया। धर्मसभा के समापन पर साध्वीश्री ने मांगलिक प्रदान किया और साध्वीश्री प्रीतियशा महाराज सा ने तप-आराधना के पचखाण दिए।
