किडनी कांड- बिहार-दिल्ली सहित कई राज्यों में फैला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क; रात के अंधेरे में आते थे ‘खास’ डॉक्टर
किडनी कांड- बिहार-दिल्ली सहित कई राज्यों में फैला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क; रात के अंधेरे में आते थे 'खास' डॉक्टर


कानपुर, 1 अप्रैल 2026। कानपुर में भंडाफोड़ हुए अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की परतें जैसे-जैसे खुल रही हैं, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का जाल केवल कानपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार, उत्तराखंड, दिल्ली, लखनऊ और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में फैला हुआ है। गिरोह के तार दक्षिण अफ्रीका तक भी जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं।


रुपयों के लेनदेन में विवाद से खुला राज
इस काले कारोबार का खुलासा तब हुआ जब किडनी डोनर (दाता) और रिसीवर (प्राप्तकर्ता) के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद पैदा हो गया। चर्चा है कि मेरठ के आयुष नामक युवक को किडनी देने के बदले मोटी रकम (करीब 60 लाख रुपये) का लालच दिया गया था। जब वादे के मुताबिक भुगतान नहीं हुआ, तो विवाद की जानकारी अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों को हुई और मामला पुलिस तक पहुँच गया।


रात के सन्नाटे में ‘दिल्ली’ की टीम करती थी सर्जरी
आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा का नेटवर्क इतना मजबूत था कि वह ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, लखनऊ और मुंबई से विशेषज्ञ डॉक्टरों की विशेष टीम बुलाता था। पुलिस के अनुसार, ये डॉक्टर रात के ढाई-तीन बजे गुपचुप तरीके से अस्पताल पहुँचते थे और सर्जरी कर सुबह होने से पहले निकल जाते थे।
बाहरी डॉक्टरों की टीम: कानपुर के इन अस्पतालों में ऑपरेशन करने के लिए लखनऊ, नोएडा और दिल्ली से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम बुलाई जाती थी।
अस्पतालों का ‘त्रिकोणीय’ नेटवर्क
पकड़े जाने से बचने के लिए गिरोह ने तीन अलग-अलग अस्पतालों का नेटवर्क बना रखा था।
आहूजा हॉस्पिटल (केशवपुरम): यहाँ रात के अंधेरे में मुख्य सर्जरी (किडनी निकालना और प्रत्यारोपित करना) की जाती थी।
मेडलाइफ हॉस्पिटल (रावतपुर): सर्जरी के तुरंत बाद किडनी देने वाले (डोनर) को यहाँ शिफ्ट कर दिया जाता था।
प्रिया हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर: किडनी लेने वाले (रिसीवर) को यहाँ रखा जाता था ताकि किसी को एक ही स्थान पर दोनों के होने का संदेह न हो।
6 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड ‘शिवम’ का बड़ा जाल
पुलिस ने अब तक इस मामले में 5 डॉक्टरों सहित 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरोह का मुख्य दलाल शिवम अग्रवाल है, जो एम्बुलेंस चालक के रूप में काम करता था और उसका कई निजी अस्पतालों में तगड़ा नेटवर्क है। शिवम बेरोजगार युवाओं और कर्ज में डूबे छात्रों को अपना निशाना बनाता था। हालिया मामले में देहरादून के एक MBA छात्र को भी इसी जाल में फंसाया गया था।
पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मास्टरमाइंड और दलाल शिवम अग्रवाल के साथ शहर के नामी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (आहूजा हॉस्पिटल के संचालक), डॉ. प्रीति आहूजा (MD मेडिसिन, आहूजा हॉस्पिटल), डॉ. राजेश कुमार (मेड लाइफ हॉस्पिटल), डॉ. राम प्रकाश (मेड लाइफ हॉस्पिटल), डॉ. नरेंद्र सिंह (प्रिया हॉस्पिटल), शिवम अग्रवाल (मुख्य दलाल/एंबुलेंस चालक) .

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन: दक्षिण अफ्रीकी महिला का हुआ ट्रांसप्लांट
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इसी साल 3 मार्च 2026 को एक दक्षिण अफ्रीकी महिला का अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। पिछले दो वर्षों में इस गिरोह द्वारा लगभग 50 अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने की आशंका है। प्रत्येक सौदे में गिरोह 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की वसूली करता था।
पुलिस की घेराबंदी
कानपुर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर कल्याणपुर और रावतपुर के 6 संदिग्ध अस्पतालों पर नजर रखी जा रही है। वर्तमान में गिरफ्तार डॉक्टरों और दलालों से पूछताछ कर दिल्ली और बिहार के अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा रहा है।
कैसे चलता था काला खेल?
गरीबों को निशाना: गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं और छात्रों को निशाना बनाता था। हालिया मामले में देहरादून के एक MBA छात्र को ₹6 लाख का लालच देकर उसकी किडनी निकलवाई गई।
भारी वसूली: डोनर को महज 5-10 लाख रुपये देकर उसकी किडनी निकाली जाती थी, जिसे जरूरतमंद मरीजों (रिसीवर) को ₹60 लाख से ₹1 करोड़ तक में बेचा जाता था।
अस्पतालों का नेटवर्क: ऑपरेशन अक्सर आहूजा हॉस्पिटल में देर रात गोपनीय तरीके से किए जाते थे। सर्जरी के तुरंत बाद पकड़े जाने के डर से डोनर और रिसीवर को अलग-अलग निजी अस्पतालों (प्रिया और मेड लाइफ) में शिफ्ट कर दिया जाता था।
अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने 3 मार्च 2026 को एक दक्षिण अफ्रीकी महिला का भी अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किया था। पुलिस को अब तक करीब 50 ऐसे अवैध ट्रांसप्लांट के सुराग मिले हैं जो पिछले दो वर्षों में किए गए हैं।
पुलिस की कार्रवाई
कानपुर पुलिस कमिश्नर के अनुसार, कल्याणपुर और रावतपुर इलाके के 6 अस्पतालों पर नजर रखी जा रही है, जिनमें से आहूजा, प्रिया और मेड लाइफ हॉस्पिटल पर सीधी छापेमारी की गई है। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में दवाएं और ₹1.75 लाख नकद बरामद किए हैं। फरार चल रहे 4 अन्य डॉक्टरों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
