केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (मरुक्षेत्रीय केंद्र) का 53वां स्थापना दिवस संपन्न, भेड़पालन को बताया किसानों के लिए ‘एटीएम’

केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (मरुक्षेत्रीय केंद्र) का 53वां स्थापना दिवस संपन्न; भेड़पालन को बताया किसानों के लिए 'एटीएम'
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quicjZaps 15 sept 2025
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बीकानेर। 4 अप्रैल। भाकृअनुप-केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर के बीकानेर स्थित मरुक्षेत्रीय केंद्र का 53वां स्थापना दिवस शनिवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ‘किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया, जिसमें भेड़पालन की आधुनिक तकनीकों और किसानों की आय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

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भेड़पालन: कम लागत में अधिक मुनाफे का सौदा
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अविकानगर संस्थान के निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर ने वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि भेड़पालन किसानों के लिए ‘एटीएम’ की तरह है, जिससे जरूरत पड़ने पर तत्काल आर्थिक लाभ लिया जा सकता है। उन्होंने तुलनात्मक तथ्य रखते हुए बताया कि बकरी की अपेक्षा भेड़ का वजन जल्दी बढ़ता है; भेड़ का मेमना जो वजन 3 महीने में प्राप्त कर लेता है, उसे प्राप्त करने में बकरी के बच्चे को 5 से 6 महीने लग जाते हैं। उन्होंने जोर दिया कि भेड़पालन कम संसाधनों में भी अधिक लाभकारी है और इसे वैज्ञानिक तरीके से अपनाकर किसान अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं।

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ऊंट और भेड़पालन पर मिलकर होगा कार्य
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान संस्थान (NRCC) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पुनिया ने केंद्र की किसान हितैषी गतिविधियों की सराहना की। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि बीकानेर क्षेत्र में दोनों संस्थान मिलकर कार्य करें ताकि किसानों को भेड़ और ऊंट, दोनों पशुओं के प्रबंधन का लाभ एक साथ मिल सके। केंद्र प्रभारी श्रीमती निर्मला सैनी ने संस्थान की पिछले वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।

महत्वपूर्ण एमओयू और प्रकाशनों का विमोचन
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में ऊन की गुणवत्ता और उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उर्मूल सीमांत समिति, बज्जू और अविकानगर संस्थान के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर अतिथियों द्वारा केंद्र के दो प्रकाशनों—”कृषक सफलता की कहानी” और “प्रसार पत्र” फोल्डर का विमोचन भी किया गया।

किसानों के साथ सीधा संवाद और पौधरोपण
संगोष्ठी में लूणकरणसर, कोटड़ी, गोलरी और गाढ़वाला के 80 से अधिक अनुसूचित जाति उपयोजना (SCSP) के किसानों ने भाग लिया। वैज्ञानिकों और किसानों के बीच पशुओं की बीमारियों और प्रबंधन को लेकर सीधा संवाद हुआ। इससे पूर्व, अतिथियों ने केंद्र के नवनिर्मित प्रवेश द्वार का उद्घाटन किया और परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इस सफल आयोजन में डॉ. विजय कुमार, डॉ. आशीष चोपड़ा, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. गोविन्द मकराना, डॉ. चेतन पाटिल और देवीलाल मौर्य का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अशोक कुमार ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।