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quicjZaps 15 sept 2025

जिला स्तरीय जनसुनवाई गुरुवार को कलेक्ट्रेट में

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बीकानेर,19 मई। जिला स्तरीय जनसुनवाई का आयोजन 21 मई को प्रातः 11 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय सतर्कता समिति की बैठक के बाद किया जाएगा। लोक सेवाएं, प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के सहायक निदेशक ने यह जानकारी दी।
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गर्मी की गहरी जुताई बनी खरीफ फसलों की संजीवनी

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प्लाउ से किसान कर रहे खरीफ फसलों की बुवाई की वैज्ञानिक तैयारी
क्षेत्र में कपास की बुवाई प्रगति पर

बीकानेर, 19 मई। आगामी खरीफ सीजन को लेकर किसान खेतों की तैयारी में जुट गए हैं। क्षेत्र में गर्मी की गहरी जुताई का कार्य तेज गति से चल रहा है तथा कई किसानों ने कपास की बुवाई भी प्रारम्भ कर दी है। गर्मी के मौसम में मिट्टी पलटने वाले हल (एमबी प्लाऊ) से की गई गहरी जुताई भूमि की सेहत सुधारने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सहायक निदेशक (उद्यान) श्री मुकेश गहलोत ने बताया कि गर्मी में गहरी जुताई करने से भूमि की जल धारण क्षमता बढ़ती है, मिट्टी भुरभुरी बनती है तथा खेत में मौजूद खरपतवारों के बीज, कीटों के अंडे एवं मृदा जनित रोग तेज धूप के प्रभाव से काफी हद तक नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को जुताई के बाद खेत कुछ समय खुला छोड़ना चाहिए ताकि सूर्य की तेज किरणों का पूरा लाभ मिल सके।

उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेतों में कच्चा गोबर नहीं डालना चाहिए, क्योंकि इससे दीमक जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसके स्थान पर पूर्णतः सड़ी-गली गोबर खाद एवं कम्पोस्ट खाद का उपयोग करना अधिक लाभकारी रहता है। वर्तमान समय में किसान प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कम्पोस्ट खाद के उपयोग की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

नोखा क्षेत्र के मान्याणा गांव के प्रगतिशील किसान मदनलाल भाम्भू की तरह ही क्षेत्र के किसान अपने खेत में ढलान के विपरीत दिशा में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई कर नमी संरक्षण की दिशा में प्रभावी प्रयास कर रहे है। कृषक मदनलाल ने बताया कि इस तकनीक से वर्षा जल का संरक्षण बेहतर होता है तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में सहायता मिलती है साथ ही खरपतवार एवं कीट नियंत्रण में भी यह पद्धति कारगर साबित हो रही है।

मदनलाल भाम्भू ने इस सप्ताह अपने खेत में कपास की बुवाई की है तथा आगामी दिनों में लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफली की बुवाई करने की योजना बनाई है। उन्होंने बताया बेहतर उत्पादन एवं जल की बचत को ध्यान में रखते हुए कपास की खेती ड्रिप सिंचाई पद्धति से करना अधिक लाभकारी रहता है। ड्रिप सिंचाई से फसल को आवश्यकतानुसार पानी मिलता है, जिससे पानी की बचत होने के साथ पौधों की बढ़वार भी अच्छी होती है।

इससे खेतों में अनावश्यक नमी कम रहने के कारण कई प्रकार के कीट एवं रोगों का प्रकोप भी कम देखने को मिलता है।
उद्यान विभाग द्वारा ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर किसानों को अनुदान भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे किसान आधुनिक सिंचाई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।गहरी जुताई, जैविक खादों का उपयोग तथा ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
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