‘बेटे की चाहत’ और ‘डायरी का राज’; क्या मां ने ही अपनी दो मासूम बेटियों को दिया जहर?
क्या मां ने ही अपनी दो मासूम बेटियों को दिया जहर



अहमदाबाद डोसा डेथ केस


अहमदाबाद ,13 अप्रैल। गुजरात के अहमदाबाद (चांदखेड़ा) में डोसा खाने से दो मासूम बच्चियों की मौत का मामला अब एक “खौफनाक साजिश” की ओर मुड़ता नजर आ रहा है। जिसे शुरुआत में ‘फूड पॉइजनिंग’ माना जा रहा था, वह अब पुलिस की जांच में “बेटे की चाहत” में की गई हत्या का संदिग्ध मामला बन गया है।


डोसा बैटर पर संदेह हुआ खत्म
जांच के दौरान अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने पाया कि जिस डेयरी से विमल प्रजापति ने 3 किलो डोसा बैटर खरीदा था, उसी बैच का बैटर 200 अन्य लोगों ने भी इस्तेमाल किया, लेकिन कोई बीमार नहीं पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह था कि 3 महीने की बच्ची राहा को डोसा कैसे खिलाया जा सकता है? इसी सवाल ने पुलिस के संदेह को पुख्ता किया।
डायरी और ‘बेटा’ पाने की सनक
पुलिस को आरोपी मां भावना के माता-पिता के घर से एक डायरी मिली है। इस डायरी ने मामले की दिशा ही बदल दी। डायरी के पन्नों से पता चला कि भावना एक बेटा चाहती थी।
मन्नत और तनाव: पहली बेटी के बाद जब दूसरी बार उसे बेटी (राहा) हुई, तो वह अत्यधिक मानसिक तनाव में थी।
लिखावट का राज: डायरी में उसने बेटे की चाहत और उसके लिए मंदिरों में मांगी गई मन्नतों का जिक्र किया था।
चूहे मारने की दवा और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट
एडिशनल कमिश्नर नीरज बडगूजर के अनुसार, माता-पिता के ब्लड टेस्ट में ‘एल्युमिनियम फॉस्फाइड’ पाया गया है, जो चूहे मारने वाली दवा या कीटनाशक में इस्तेमाल होता है।
गायब पैकेट: पिता विमल ने स्वीकार किया कि उसने गेहूं सुरक्षित रखने के लिए 10 पैकेट दवा खरीदी थी, जिसमें से 8 इस्तेमाल हुए और 2 पैकेट गायब हैं, जिनका वह हिसाब नहीं दे पाया।
कब्र से निकाला गया शव
सच्चाई जानने के लिए पुलिस ने 3 महीने की राहा के शव को कब्र से निकालकर पैनल पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा है। पुलिस को अंदेशा है कि भावना ने बेटे की चाहत और पारिवारिक कलह के चलते यह आत्मघाती कदम उठाया, जिसमें बेटियों को जहर देकर खुद भी जहर खा लिया। फिलहाल विमल और भावना की स्थिति स्थिर है और पुलिस उनसे कड़ी पूछताछ कर रही है।
