राजस्थान में “पर्ची सरकार” और “रिमोट कंट्रोल से चलने वाली व्यवस्था- बेनीवाल

प्रदेश की जनता को कटुता नहीं, विकास और सुशासन चाहिए: सुमन छाजेड़
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बीकानेर \ जयपुर , 29 मई। नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के राष्ट्रीय संयोजक हनुमान बेनीवाल द्वारा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार पर की गई कथित तीखी एवं अमर्यादित टिप्पणियों ने प्रदेश के सियासी पारे को गरमा दिया है। अपने आक्रामक और बेबाक बयानों के लिए जाने जाने वाले बेनीवाल के इस ताजा रुख पर सत्ता पक्ष (भाजपा) ने कड़ी आपत्ति जताई है, जबकि सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पर बहस छिड़ गई है।

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सरकार के वजूद और कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

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सांसद हनुमान बेनीवाल ने एक मीडिया वार्ता और सार्वजनिक मंचों से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रशासनिक पकड़ और सरकार के संचालन के तरीकों पर बेहद तल्ख टिप्पणी की। बेनीवाल ने तंज कसते हुए कहा कि राजस्थान में यह समझ पाना ही मुश्किल हो रहा है कि वास्तव में मुख्यमंत्री कौन है या प्रदेश में कोई प्रभावी सरकार काम भी कर रही है या नहीं।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को अपने कार्यक्रमों और निर्णयों की अग्रिम जानकारी तक नहीं होती है और नौकरशाही पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है। बेनीवाल ने सरकार को “पर्ची सरकार” और “रिमोट कंट्रोल से चलने वाली व्यवस्था” करार देते हुए प्रशासनिक विफलता के गंभीर आरोप लगाए।

भाजपा का तीखा पलटवार: “यह राजस्थान के मुखिया और जनता का अपमान”

हनुमान बेनीवाल के इन बयानों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश नेतृत्व और मंत्रियों ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा प्रवक्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने बेनीवाल की भाषा को ‘अमर्यादित और अभद्र’ बताते हुए कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की शब्दावली का प्रयोग लोकतांत्रिक मर्यादाओं के बिल्कुल खिलाफ है।

भाजपा नेताओं ने कहा

मर्यादा का उल्लंघन: मुख्यमंत्री किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे राज्य के होते हैं। उनके खिलाफ की गई ओछी टिप्पणी राजस्थान की साख और यहां की जनता के जनादेश का अपमान है।

हताशा का परिणाम: सत्ता पक्ष का दावा है कि राजनीतिक रूप से जमीन खिसकने और अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए आरएलपी सुप्रीमो इस प्रकार की विवादित बयानबाजी का सहारा ले रहे हैं।

चुनावी और क्षेत्रीय समीकरणों पर असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हनुमान बेनीवाल का यह आक्रामक रुख राजस्थान में आगामी स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों के मद्देनजर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। वे लगातार युवाओं, किसानों और स्थानीय मुद्दों को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों पर मिलीभगत का आरोप लगाते आए हैं। हालांकि, इस तरह की तीखी व्यक्तिगत टिप्पणियों से प्रदेश में जाट बनाम अन्य जातियों के राजनीतिक ध्रुवीकरण की सुगबुगाहट भी तेज हो गई है।

प्रदेश की जनता को कटुता नहीं, विकास और सुशासन चाहिए: सुमन छाजेड़

बीकानेर। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार के खिलाफ की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी का मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस बयान को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खेमे में भारी रोष है। इसी क्रम में बीकानेर की वरिष्ठ भाजपा नेता एवं भाजपा शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने सांसद बेनीवाल के इस रुख पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को सार्वजनिक मंचों से अपनी भाषा में संयम और गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी है।

मतभेद स्वाभाविक, लेकिन भाषा की मर्यादा जरूरी
भाजपा शहर जिलाध्यक्ष सुमन छाजेड़ ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में वैचारिक मतभेद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। विपक्ष का काम सरकार की नीतियों की आलोचना करना है, लेकिन आलोचना और अपनी बात रखने की एक तय मर्यादा, शालीनता और गरिमा होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को, जो लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, अपनी भाषाई गरिमा की सीमाएं नहीं लांघनी चाहिए।

राजस्थान की राजनीतिक परंपराएं हो रही हैं दूषित

सुमन छाजेड़ ने राजस्थान के गौरवमयी राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मरुधरा की राजनीति सदैव उच्च संस्कारों, स्वस्थ संवाद और मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए पूरे देश में जानी जाती रही है। यहाँ पक्ष और विपक्ष के बीच हमेशा सम्मानजनक रिश्ते रहे हैं। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, “संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों पर व्यक्तिगत टिप्पणियां करना और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करना न केवल राजनीतिक वातावरण को दूषित करता है, बल्कि हमारी समृद्ध लोकतांत्रिक परंपराओं को भी कमजोर करता है।”

जनता को आरोप-प्रत्यारोप नहीं, सुशासन पसंद
भाजपा नेत्री ने साफ तौर पर कहा कि आज के दौर में प्रदेश की सजग जनता विकास, सुशासन और जनकल्याणकारी मुद्दों पर आधारित सकारात्मक राजनीति देखना चाहती है। जनता अब नेताओं की आपसी कटुता, व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप और द्वेषपूर्ण बयानबाजी से ऊब चुकी है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और उनके शीर्ष नेताओं से अपील की कि वे जनभावनाओं का सम्मान करें और समाज में नकारात्मकता फैलाने के बजाय संयमित व सकारात्मक संवाद को बढ़ावा दें।

सुमन छाजेड़ ने अपने बयान के अंत में दोहराया कि मर्यादित और अनुशासित राजनीति ही हमारे लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है। सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले हर व्यक्ति को शालीनता, जिम्मेदारी और गरिमा के सिद्धांतों का पालन करना ही चाहिए।

फिलहाल, इस कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया और बयानों का दौर लगातार जारी है, जिससे आने वाले दिनों में राजस्थान की राजनीति और अधिक गरमाने के आसार हैं।

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