डिजिटल जनगणना के नाम पर राजस्थान में बढ़ा साइबर फ्रॉड का खतरा
डिजिटल जनगणना के नाम पर राजस्थान में बढ़ा साइबर फ्रॉड का खतरा



- पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
जयपुर, 17 अप्रैल। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की जा रही डिजिटल जनगणना की आड़ में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं। राजस्थान पुलिस ने आमजन को सतर्क करते हुए बताया है कि ठग जनगणना अधिकारी बनकर कॉल, मैसेज या घर आकर लोगों के बैंक खातों में सेंध लगा सकते हैं।


ठगी के तीन प्रमुख तरीके


फेक कॉल और स्क्रीन शेयरिंग: अपराधी खुद को अधिकारी बताकर परिवार की जानकारी और बैंक डिटेल्स मांगते हैं। वे ‘AnyDesk’ या ‘TeamViewer’ जैसे ऐप डाउनलोड करवाकर आपके फोन का कंट्रोल ले लेते हैं और बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं।
घर आकर ओटीपी मांगना: कुछ ठग घर आकर टैबलेट पर जानकारी भरने का दिखावा करते हैं और सुविधाओं के पंजीकरण के बहाने आपसे ओटीपी मांगते हैं, जो असल में बैंक ट्रांजैक्शन का होता है।
संदिग्ध लिंक: “जनगणना अपडेट न करने पर सरकारी सुविधा बंद होने” जैसे डरावने मैसेज भेजकर लिंक पर क्लिक करने को कहा जाता है।
क्या है सही प्रक्रिया? (Self-Enumeration)
उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के अनुसार, भारत सरकार ने स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा दी है। इसके लिए केवल आधिकारिक वेबसाइट www.se.census.gov.in पर ही भरोसा करें। स्व-गणना की अवधि 1 मई 2026 से 15 मई 2026 तक है। ध्यान रहे कि जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क है; इसमें कोई फीस या क्यूआर कोड (QR Code) पेमेंट नहीं होता।
सुरक्षा के उपाय
- किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही ओटीपी साझा करें।
- घर आने वाले व्यक्ति का आईडी कार्ड जरूर देखें और स्थानीय बीएलओ (BLO) से इसकी पुष्टि करें।
- ‘फ्री राशन’ या लुभावने सरकारी मैसेज के चक्कर में अपनी निजी जानकारी न दें।
यहां करें शिकायत
यदि आप साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्प डेस्क 9256001930 / 9257510100 पर संपर्क करें। आप अपनी शिकायत https://cybercrime.gov.in पोर्टल या नजदीकी पुलिस स्टेशन में भी दर्ज करा सकते हैं।
