वीरता की एक मशाल बुझ गई! बीकानेर के इस जांबाज महानायक को कोटि-कोटि नमन

वीरता की एक मशाल बुझ गई! बीकानेर के इस जांबाज महानायक को कोटि-कोटि नमन
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  • 1971 के युद्ध में ऊंटों पर सवार होकर पाकिस्तान में तिरंगा फहराने वाले वीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ अब हमारे बीच नहीं रहे।

बीकानेर , 29 अप्रैल। बीकानेर और देश के लिए आज एक अत्यंत दुखद समाचार है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के महानायक और वीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ (87) का मंगलवार को सादुलगंज स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे। उनके जाने से सैन्य जगत और बीकानेर ने अपना एक जांबाज सपूत खो दिया है।

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ऊंटों पर सवार होकर पाकिस्तान में गाड़ा था तिरंगा
ब्रिगेडियर जगमाल सिंह की वीरता की कहानियां आज भी सेना के गलियारों में गूँजती हैं। 1971 के युद्ध में वे ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की 13वीं बटालियन (गंगा जैसलमेर) में मेजर के पद पर तैनात थे। उस समय आधुनिक वाहनों की कमी के कारण वे अपनी टुकड़ी के साथ ऊंटों पर सवार होकर पाकिस्तानी सीमा में 16 किलोमीटर अंदर तक घुस गए थे। उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन की रानीहल चेकपोस्ट पर कब्जा किया और वहां तिरंगा फहराकर पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

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वीर चक्र से हुए थे सम्मानित
6 दिसंबर 1971 को हुई उस निर्णायक लड़ाई में जब भारी गोलाबारी के बीच भारतीय टुकड़ी की रफ्तार धीमी पड़ रही थी, तब मेजर जगमाल सिंह ने स्वयं एक प्लाटून का नेतृत्व किया और किनारे से हमला कर दुश्मन को संभलने का मौका नहीं दिया। इस व्यक्तिगत वीरता और सामरिक नेतृत्व के लिए उन्हें 1972 में तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा वीर चक्र से नवाजा गया था।

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के थे ताऊजी
ब्रिगेडियर जगमाल सिंह,ओलंपियन और वर्तमान कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के ताऊजी थे।अपने पारिवारिक सदस्य और मार्गदर्शक को अंतिम विदाई देने के लिए मंत्री राठौड़ मंगलवार रात ही बीकानेर पहुँच चुके।

आज अंतिम संस्कार
ब्रिगेडियर साहब की अंतिम यात्रा बुधवार को उनके निवास से रवाना हुयी और डुप्लेक्स कॉलोनी स्थित राजपूत शांति धाम में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया । उनकी बेटी कविता राठौड़ ने बताया कि अंतिम दिनों तक वे काफी सक्रिय और ऊर्जामान थे।

ब्रिगेडियर जगमाल सिंह राठौड़ का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए राष्ट्रवाद और साहस का एक जीवंत उदाहरण रहेगा।

 

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