भंवरलाल ‘भ्रमर’ और संतोष चौधरी को ‘गोयल स्मृति कथा-साहित्य पुरस्कार’ से किया गया सम्मानित

भंवरलाल 'भ्रमर' और संतोष चौधरी को 'गोयल स्मृति कथा-साहित्य पुरस्कार' से किया गया सम्मानित
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बीकानेर, 3 मई। राजस्थानी भाषा और साहित्य के संवर्धन की दिशा में मुक्ति संस्था द्वारा शनिवार देर शाम स्टेशन रोड स्थित होटल राजमहल में एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। अवसर था ‘पांचवां पोकरमल-राजरानी गोयल स्मृति राजस्थानी कथा-साहित्य पुरस्कार-2026’ के अर्पण का, जहाँ प्रदेश के दो विशिष्ट रचनाकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए नवाजा गया।

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इन कृतियों को मिला सम्मान
समारोह में बीकानेर के वरिष्ठ साहित्यकार भंवरलाल ‘भ्रमर’ को उनकी चर्चित कृति ‘उपरलो पासो’ तथा जोधपुर की प्रख्यात रचनाकार संतोष चौधरी को उनके कहानी-संग्रह ‘काया री कळझळ’ के लिए पुरस्कृत किया गया। अतिथियों ने दोनों साहित्यकारों को ग्यारह हजार रुपये का चेक, अभिनंदन पत्र, स्मृति चिह्न, शॉल और श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

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भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प
मुक्ति संस्थान के सचिव राजेन्द्र जोशी ने पुरस्कार की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस सम्मान का उद्देश्य राजस्थानी भाषा को गांवों की चौपालों से निकालकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिल रंजन गर्ग ने साहित्य को समाज की आत्मा बताया और आयोजन की निरंतरता की सराहना की।

प्रमुख वक्ताओं के विचार
बुलाकी शर्मा (मुख्य अतिथि): वरिष्ठ साहित्यकार बुलाकी शर्मा ने क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण चयन ही इस कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाता है।

मधु आचार्य ‘आशावादी’: उन्होंने पिछले पांच वर्षों की पुरस्कार परंपरा और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

संतोष चौधरी (पुरस्कृत लेखिका): अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी मातृभाषा में सृजन करना आत्मिक संतोष देता है और यह सम्मान भविष्य के लिए नई ऊर्जा देगा।

साहित्यकारों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर निर्णायक मंडल और सहयोग देने वाले वरिष्ठ साहित्यकारों—डॉ. अजय जोशी, डॉ. रेणुका व्यास, डॉ. हरिशंकर आचार्य, डॉ. मदन सैनी सहित कई अन्य विद्वानों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष राजेश गोयल ने सभी का आभार व्यक्त किया।  समारोह में शहर के प्रमुख बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और साहित्यप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संचालन ज्योति प्रकाश रंगा द्वारा किया गया।

 

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