हीमोफीलिया प्रबंधन में नई क्रांति, बीकानेर में ‘इनहिबिटर’ पर विशेष सीएमई आयोजित, एमिसिज़ुमैब को बताया गया ‘गेम चेंजर’

हीमोफीलिया प्रबंधन में नई क्रांति, बीकानेर में 'इनहिबिटर' पर विशेष सीएमई आयोजित, एमिसिज़ुमैब को बताया गया 'गेम चेंजर'
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quicjZaps 15 sept 2025

बीकानेर, 3 मई। बीकानेर पीडियाट्रिक सोसाइटी के तत्वावधान में शनिवार को “इनहिबिटर प्रबंधन इन हीमोफीलिया” विषय पर एक महत्वपूर्ण सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम का आयोजन होटल द पार्क पैराडाइज़ में किया गया। इस वैज्ञानिक सत्र में शहर के 50 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों और संकाय सदस्यों ने भाग लेकर हीमोफीलिया के जटिल उपचारों पर मंथन किया।

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इनहिबिटर: हीमोफीलिया की सबसे बड़ी चुनौती
कार्यक्रम का शुभारंभ पीबीएम अस्पताल के बच्चा विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) जी. एस. तंवर के संबोधन से हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि हीमोफीलिया के मरीजों में ‘इनहिबिटर’ का विकसित होना सबसे बड़ी चिकित्सकीय बाधा है। डॉ. तंवर ने चिकित्सकों को सलाह दी कि यदि किसी रोगी के जोड़ों में रक्तस्राव सामान्य से अधिक समय तक बना रहे या सामान्य फैक्टर डोज बेअसर होने लगे, तो तत्काल इनहिबिटर की जांच करनी चाहिए।

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उपचार की नई दिशा: एमिसिज़ुमैब और जीन थेरेपी
वैज्ञानिक सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने उपचार के आधुनिक विकल्पों पर चर्चा की:

एमिसिज़ुमैब (Emicizumab): इसे हीमोफीलिया प्रबंधन में एक “गेम चेंजर” बताया गया, जो मरीजों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार ला सकता है।

बाईपासिंग एजेंट्स: डॉ. गौरव गोम्बर और डॉ. श्याम अग्रवाल ने इनहिबिटर के प्रबंधन में बाईपासिंग एजेंट्स (जैसे FEIBA, Factor VIIa) और इम्यून टॉलरेंस थेरेपी के व्यावहारिक उपयोग पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

भविष्य की राह: डॉ. तंवर ने जीन थेरेपी के माध्यम से हीमोफीलिया के पूर्ण उपचार की उज्ज्वल संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

बीकानेर बनेगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’
सत्र के समापन पर प्रो. तंवर ने “संदेह करो, जांच करो और उपचार करो” का मूल मंत्र दिया। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि बीकानेर को भविष्य में हीमोफीलिया देखभाल के उत्कृष्ट केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम में रेजिडेंट चिकित्सकों की शंकाओं का समाधान विशेषज्ञों द्वारा सरल और व्यावहारिक तरीके से किया गया।  इस आयोजन ने क्षेत्र के चिकित्सकों को नवीनतम चिकित्सा तकनीकों और शोध से अवगत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

sjps