भिक्षु चरमोत्सव एवं तप अभिनंदन समारोह संपन्न
भिक्षु चरमोत्सव एवं तप अभिनंदन समारोह संपन्न




मुनि श्री आकाश कुमार जी ने आचार्य भिक्षु को बताया प्रेरणा का पुंज


राजराजेश्वरी नगर (बेंगलुरु), 24 सितंबर। तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य प्रवर्तक महामना आचार्य श्री भिक्षु के 225वें चरमोत्सव (बड़ी तेरस) के अवसर पर राजराजेश्वरी नगर स्थित तेरापंथ भवन में भिक्षु चरमोत्सव एवं तप अभिनंदन समारोह श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया।


समारोह को संबोधित करते हुए चातुर्मासरत मुनि श्री आकाश कुमार जी ने कहा कि मनुष्य स्वभाव से उत्सवप्रिय होता है और उत्सव उसे नई ऊर्जा तथा प्रेरणा प्रदान करते हैं। आचार्य भिक्षु का चरमोत्सव लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था एवं प्रेरणा का केंद्र है। इतिहास में ऐसे विरले ही महापुरुष होते हैं, जिनकी स्मृति में पीढ़ियां श्रद्धा एवं समर्पण के साथ उत्सव मनाती हैं।
वहीं, मुनि श्री हितेंद्र कुमार जी ने अपने प्रेरणादायी वक्तव्य में ‘B.H.I.K.S.H.U.’ शब्द के माध्यम से अंग्रेजी वर्णमाला के आधार पर रोचक एवं सारगर्भित ढंग से आचार्य श्री भिक्षु के जीवन, व्यक्तित्व तथा कर्तृत्व से जुड़ी विभिन्न घटनाओं और प्रसंगों का सुंदर उल्लेख किया।
कार्यक्रम में सभाध्यक्ष कमल सिंह दूगड़ ने महामना के चरणों में भावांजलि अर्पित करते हुए उनके सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। तेरापंथ युवक परिषद् के अध्यक्ष सरल पटावरी ने भी स्वामी जी के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए सभी तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना की।
कंठी तप और तपस्वियों का अभिनंदन
इस अवसर पर कंठी तप करने वाले 12 तपस्वियों का विशेष सम्मान किया गया। इनमें महेश मांडोत एवं श्रीमती पद्मा मेहर ने उपवास द्वारा तथा सुशीला बाई छाजेड़, वंदना भंसाली, मानिका सेठिया, लीना छाजेड़, अनिता बैद, आशा लोढ़ा, वंदना दुगड़, कविता बैद, श्रद्धा मणोत एवं खुशबू मांडोत ने एकासनपूर्वक कंठी तप संपन्न किया। इसके अलावा श्रीमती सलोनी नाहटा ने 16 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। सभा द्वारा सभी तपस्वियों का सम्मान किया गया तथा अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने तप के माध्यम से तपस्वियों की अनुमोदना की।
उल्लेखनीय है कि चरमोत्सव के अवसर पर तेरापंथ भवन में 13 घंटे का एकदिवसीय ‘ॐ भिक्षु’ का अखंड जाप आयोजित किया गया, जबकि मुनिश्री की प्रेरणा से श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों में भी श्रद्धापूर्वक ‘ॐ भिक्षु’ का जाप किया।
