बीकानेर में प्रवासी साहित्यकार ललित शर्मा का अभिनंदन

बीकानेर में प्रवासी साहित्यकार ललित शर्मा का अभिनंदन
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  • मरुधरा के धोरों से मिलीं ब्रह्मपुत्र की लहरें

बीकानेर, 4 मई। साहित्य और संस्कृति की साझा विरासत को सहेजने के उद्देश्य से सोमवार को ‘साझी विरासत बीकानेर’ के तत्वावधान में तपसी-भवन में एक गरिमामय समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डिब्रूगढ़ (असम) निवासी प्रसिद्ध हिंदी-असमी साहित्यकार ललित शर्मा का भावभीना अभिनंदन एवं काव्य पाठ संपन्न हुआ।

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दो संस्कृतियों के बीच सेतु हैं ललित शर्मा
समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने मरुधरा और असम के भाषाई जुड़ाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ललित शर्मा जी जैसे साहित्यकार दो संस्कृतियों के बीच एक अटूट पुल का निर्माण करते हैं। उनके यहाँ आने से ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो ब्रह्मपुत्र की लहरें मरुधरा के धोरों से मिलने आई हैं।

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साहित्यिक सम्मान और संवाद
अतिथियों ने ललित शर्मा को शाल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि डॉ. अजय जोशी ने कहा कि ललित जी ने हिंदी और असमी के बीच जो भाषाई सामंजस्य बैठाया है, वह आज के समय की बड़ी जरूरत है। विशिष्ट अतिथि राजाराम स्वर्णकार ने उनकी कविताओं में असमी जनजीवन के संघर्ष और राजस्थानी गौरव के सुंदर मेल की सराहना की।

अभिनंदन पत्र का वाचन: चित्रकार योगेंद्र पुरोहित ने ललित शर्मा के व्यक्तित्व और उनके साहित्यिक सफर पर विस्तार से प्रकाश डाला।

“मिट्टी में वापसी का सुखद अहसास”
सम्मान से अभिभूत ललित शर्मा ने कहा कि डिब्रूगढ़ उनकी कर्मभूमि जरूर है, लेकिन राजस्थान उनकी रगों में बसता है। उन्होंने साझा विरासत के इस मंच को ‘घर वापसी’ जैसा सुखद अहसास बताया।

त्रिवेणी काव्य पाठ
समारोह के दौरान काव्य पाठ में भाषाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। ललित शर्मा ने असमी, राजेन्द्र जोशी ने राजस्थानी और राजाराम स्वर्णकार ने हिंदी कविताओं का पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन प्रेणा ने किया।

 

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