राजस्थानी भाषा का अनिवार्य शिक्षण शिक्षा जगत में क्रांतिकारी कदम- प्रशांत बिस्सा
राजस्थानी भाषा का अनिवार्य शिक्षण शिक्षा जगत में क्रांतिकारी कदम- प्रशांत बिस्सा


बीकानेर, 14 मई। राजस्थानी भाषा को विद्यालयों में अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने के माननीय सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय के बाद बीकानेर सहित पूरे प्रदेश में हर्ष का माहौल है। इसी कड़ी में नेहरू शारदा पीजी महाविद्यालय के राजस्थानी विभाग और राजस्थानी मोट्यार परिषद के संयुक्त तत्वावधान में “हरख उछब” (खुशी का उत्सव) कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया।


अगले सत्र से शुरू होगा राजस्थानी में स्नातकोत्तर (MA) पाठ्यक्रम
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रशांत बिस्सा ने इस निर्णय को शिक्षा जगत के लिए ‘क्रांतिकारी’ बताया। उन्होंने एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा।
पीजी कोर्स: नेहरू शारदा पीजी महाविद्यालय में आगामी शैक्षणिक सत्र से राजस्थानी विषय में स्नातकोत्तर (MA) स्तर की पढ़ाई शुरू की जाएगी।
शैक्षणिक गुणवत्ता: मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार आएगा।


आठवीं अनुसूची और रोजगार का मार्ग प्रशस्त
साहित्यकारों और शिक्षाविदों ने इस निर्णय के दूरगामी परिणामों पर चर्चा की।
संवैधानिक मान्यता: वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि यदि राज्य सरकार इसे प्रभावी रूप से लागू करती है, तो राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की राह आसान हो जाएगी।
रोजगार के अवसर: विभागाध्यक्ष डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने रेखांकित किया कि अनिवार्य विषय बनने से भविष्य में लाखों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि राजस्थानी हमारी पहचान और संस्कृति का माध्यम है।
साहित्यिक चर्चा और काव्य पाठ
वरिष्ठ साहित्यकार राजाराम स्वर्णकार और डॉ. नमामि शंकर आचार्य ने इसे मातृभाषा के गौरव की पुनर्स्थापना बताया। सकुर बीकाणवी ने अपनी कविताओं के माध्यम से राजस्थानी संस्कृति की महत्ता बताई।
कार्यक्रम में डॉ. समीक्षा व्यास, राजकुमार पुरोहित, डॉ. नीतू बिस्सा सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
सम्मान और सहभागिता
कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर महाविद्यालय परिवार द्वारा राजस्थानी मोट्यार परिषद का विशेष सम्मान किया गया। आयोजन में डॉ. रमेश भोजक, डॉ. पूनम वाधवानी, डॉ. दीपा हर्ष सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद और विद्यार्थी उपस्थित रहे।


