बीकानेर में वैज्ञानिक भेड़-बकरी पालन से उद्यमिता विकास पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू
बीकानेर में वैज्ञानिक भेड़-बकरी पालन से उद्यमिता विकास पर सात दिवसीय प्रशिक्षण शुरू



बीकानेर, 13 मई। स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय (SKRAU) में बुधवार से “वैज्ञानिक भेड़ एवं बकरी पालन के माध्यम से उद्यमिता विकास” विषय पर सात दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आगाज हुआ। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर के पशुधन उत्पादन एवं प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न कोनों से पशुपालक और किसान शिरकत कर रहे हैं।


10 राज्यों के 100 प्रगतिशील किसान ले रहे हैं भाग
प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक डॉ. शंकर लाल ने बताया कि इस सात दिवसीय आयोजन में राजस्थान सहित देश के 10 अलग-अलग राज्यों के कुल 100 प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पशुपालकों को पारंपरिक पद्धतियों से ऊपर उठाकर वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़ना है, ताकि वे इसे एक सफल उद्यम (बिजनेस) के रूप में विकसित कर सकें।


वैज्ञानिक विधि और बकरी के दूध का महत्व
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रजिस्ट्रार डॉ. देवराम सैनी ने भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था में पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा बीमारियों में संजीवनी: बकरी के दूध की औषधीय और पोषणात्मक उपयोगिता बढ़ रही है, विशेषकर कुछ बीमारियों के दौरान इसकी मांग बहुत अधिक रहती है।
उत्पादकता में वृद्धि: वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर पशुओं की उत्पादकता और गुणवत्ता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. वीर सिंह ने बकरी के दूध के पोषक तत्वों के बारे में विस्तार से जानकारी दी, जबकि डॉ. एच.एल. देशवाल ने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों से किसानों को अवगत कराया।
पशुपालन को उद्यमिता से जोड़ने की पहल
इस प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पशुओं के प्रबंधन, उन्नत नस्ल चयन, संतुलित आहार और बीमारियों से बचाव के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम के अंत में पशुधन उत्पादन विभाग प्रभारी डॉ. कुलदिप प्रकाश शिंदे द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
पशुपालकों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।


