पुलिसिया लापरवाही व खाकी की नाकामी से बड़ी बहन के बाद छोटी से भी गैंगरेप, न्याय न मिलने पर परेशान छोटी बहन ने भी खाया जहर
पुलिसिया लापरवाही व खाकी की नाकामी से बड़ी बहन के बाद छोटी से भी गैंगरेप, न्याय न मिलने पर परेशान छोटी बहन ने भी खाया जहर


जोधपुर, 16 मई। जोधपुर के ग्रामीण इलाके से पुलिस संवेदनशीलता और कानून व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। यहाँ पुलिसिया लापरवाही के चलते एक ही परिवार की दो सगी बहनों की जान चली गई। बड़ी बहन के गैंगरेप के बाद आरोपियों ने छोटी बहन को भी अपनी हवस का शिकार बनाया और वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करते रहे। इंसाफ के लिए दर-दर भटकने और मुकदमा दर्ज होने के 33 दिन बाद भी कार्रवाई न होने से आहत होकर छोटी बहन ने भी शुक्रवार (15 मई) को पानी की टंकी पर चढ़कर जहरीला पदार्थ खा लिया, जिससे उसकी मौत हो गई।


इस दोहरे सुसाइड कांड के बाद पूरे मारवाड़ क्षेत्र में भारी आक्रोश है। दोषियों की गिरफ्तारी और लापरवाह पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर राजपूत समाज के लोग जोधपुर के एमडीएम (MDM) हॉस्पिटल के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।


सिलसिलेवार समझें रूह कंपा देने वाला पूरा घटनाक्रम
1. बड़ी बहन से 4 साल तक गैंगरेप, तंग आकर किया सुसाइड
पीड़िता द्वारा पूर्व में की गई शिकायत के अनुसार, ई-मित्र संचालक महिपाल ने उसकी बड़ी बहन को झांसे में लेकर शारीरिक संबंध बनाए और उसका अश्लील वीडियो बना लिया। इसके बाद उसे ब्लैकमेल करने के लिए एक मोबाइल और सिम कार्ड दिया गया। महिपाल और उसके साथियों—शिवराज, गोपाल, वीजाराम, दिनेश, मनोज और पुखराज ने करीब तीन-चार साल तक बड़ी बहन का मानसिक व शारीरिक शोषण किया और पैसे ऐंठते रहे। इस असहनीय प्रताड़ना से तंग आकर बड़ी बहन ने 20 मार्च को सुसाइड कर लिया था।
2. बहन की मौत के बाद छोटी को बनाया शिकार
बड़ी बहन की मौत के बाद भी दरिंदों का दिल नहीं पसीजा। आरोपियों ने बड़ी बहन के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर छोटी बहन (पीड़िता) को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। मुख्य आरोपी महिपाल ने पीड़िता को होटल और खेतों में बुलाकर कई बार ज्यादती की। वहीं एक अन्य आरोपी गोपाल ने भी 18 मार्च को होटल और पीड़िता के घर में घुसकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
3. FIR के 33 दिन बाद भी पुलिस रही मूकदर्शक
पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर 11 अप्रैल को पुलिस थाने में 8 नामजद आरोपियों के खिलाफ गैंगरेप और ब्लैकमेलिंग की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसी दिन उसने ग्रामीण एसपी पीडी नित्या को भी लिखित शिकायत सौंपकर सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई थी। पीड़िता ने पुलिस प्रशासन को लिखित में स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि उसे न्याय नहीं मिला, तो वह भी अपनी बहन की तरह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होगी। इस गंभीर चेतावनी के बावजूद पुलिस महकमे ने आरोपियों को पकड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। पुलिस के कानों जूं तक नहीं रेंगी।
“पुलिस वाले हमारे आदमी हैं…” आरोपियों ने दी थी धमकी
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया था कि एफआईआर दर्ज होने के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे थे और उसे लगातार धमकियां दे रहे थे। आरोपियों का कहना था कि “पुलिस वाले हमारे ही आदमी हैं, विभाग हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।” उन्होंने पीड़िता को डराया था कि यदि मुकदमा वापस नहीं लिया, तो उसकी हालत भी बड़ी बहन जैसी कर दी जाएगी। पीड़िता के पिता का आरोप है कि आरोपी खुलेआम जांच अधिकारी (IO) के सामने बैठे रहते थे, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही।
हॉस्पिटल के बाहर समाज का फूटा गुस्सा, न्याय की मांग
शुक्रवार को जब सिस्टम से हताश होकर दो बच्चों की मां (छोटी बहन) करीब 4 घंटे तक पानी की टंकी पर चढ़ी रही और जहरीला पदार्थ खाकर अपनी जान दे दी, तब जाकर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा।
एमडीएम हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन कर रहे मारवाड़ राजपूत समाज के अध्यक्ष हनुमान सिंह खांगटा ने तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि एक बेबस युवती अपनी बहन को न्याय दिलाने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटती रही, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को संरक्षण दिया। समाज ने मांग की है कि इस मामले में दोषी आरोपियों के साथ-साथ उन पुलिसकर्मियों पर भी मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए, जिनकी लापरवाही ने दो बेटियों को मौत के मुंह में धकेल दिया। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति है और पुलिस के आला अधिकारी प्रदर्शनकारियों से वार्ता की कोशिश कर रहे हैं।


