मंत्रालयिक कर्मचारियों के पदस्थापन हेतु ऑनलाइन काउंसलिंग की मांग: कमल नारायण आचार्य ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा ज्ञापन
मंत्रालयिक कर्मचारियों के पदस्थापन हेतु ऑनलाइन काउंसलिंग की मांग: कमल नारायण आचार्य ने केंद्रीय मंत्री को सौंपा ज्ञापन


- रिव्यू डीपीसी 2017-18 से 2024-25 तक करवाने और ऑनलाइन काउंसलिंग से पदस्थापन की उठाई मांग
- लंबे समय से एक ही सीट पर जमे कार्मिकों द्वारा अधिकारियों को गुमराह करने का लगाया आरोप; निष्पक्ष जांच की अपील
बीकानेर, 31 मई। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ राजस्थान (बीकानेर) के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री, भारत सरकार से मुलाकात कर मंत्रालयिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पदोन्नति के बाद पदस्थापन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने हेतु ज्ञापन सौंपा। रविवार को स्व. ओम जी आचार्य की दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय मंत्री से प्रदेशाध्यक्ष ने वार्ता कर विभाग में व्याप्त विसंगतियों और आदेशों की अवहेलना पर गहरा रोष व्यक्त किया।


सरकारी आदेशों की अवहेलना और अधिकारियों को गुमराह करने का आरोप
प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि संगठन के मांग पत्र पर पूर्व में आपके कार्यालय (आदेश दिनांक 12.03.2026 व 07.04.2026) तथा महामहिम राज्यपाल महोदय के कार्यालय (पत्र दिनांक 11.05.2026) द्वारा निदेशक माध्यमिक शिक्षा को 01.04.2017 से रिव्यू डीपीसी और ऑनलाइन काउंसलिंग के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।


आरोप लगाया गया कि विभाग में लंबे समय से एक ही स्थान और एक ही सीट पर जमे कुछ कार्मिक अपने निजी हितों के चलते उच्च अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य सरकार और राजभवन से प्राप्त निर्देशों पर अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। हालांकि, निदेशक महोदय द्वारा सहायक कर्मचारी से लेकर संस्थापन अधिकारियों तक की वर्ष 2025-26 की डीपीसी करवा दी गई है, लेकिन ऑनलाइन काउंसलिंग की प्रक्रिया को अभी भी ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।
500-600 किलोमीटर दूर पदस्थापन से कर्मचारी परेशान
ज्ञापन में पुरजोर मांग की गई कि रिव्यू डीपीसी: संस्थापन अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी एवं अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी की वर्ष 2017-18 से 2024-25 तक की बकाया रिव्यू डीपीसी तुरंत करवाई जाए ताकि कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान न हो।
ऑनलाइन काउंसलिंग: पदोन्नति के बाद पदस्थापन केवल ऑनलाइन काउंसलिंग के माध्यम से ही किया जाए। वर्तमान में पद खाली होने के बावजूद कर्मचारियों को उनके घर से 500-600 किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है, जिससे वे पारिवारिक और मानसिक रूप से अव्यवस्थित हो रहे हैं।
पारदर्शिता की मांग: एक ही सीट पर लंबे समय से बैठे कार्मिकों को हटाया जाए और इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई जाए कि राज्य सरकार के पत्रों को निदेशक महोदय के समक्ष प्रस्तुत क्यों नहीं किया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने की सकारात्मक वार्ता
केंद्रीय मंत्री ने संगठन की मांगों को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि वे इस संबंध में मुख्यमंत्री महोदय से वार्ता करेंगे और ऑनलाइन काउंसलिंग से पदस्थापन सुनिश्चित करवाने का आग्रह करेंगे। इस दौरान कमल नारायण आचार्य के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल में गिरजा शंकर आचार्य और नवरत्न जोशी भी शामिल रहे, जिन्होंने ज्ञापन देकर मंत्रालयिक संवर्ग की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।



