बीकानेर में पेयजल का संकट बरकरार , जलाशयों को भरने में लगेगा एक सप्ताह
बीकानेर में पेयजल का संकट बरकरार , जलाशयों को भरने में लगेगा एक सप्ताह


- बीछवाल और शोभासर जलाशयों में पानी की आवक जारी, लेकिन अभी भी लक्ष्य से काफी पीछे
- पीबीएम अस्पताल में गहराया जल संकट; भामाशाह के सहयोग से शुरू हुआ नया ट्यूबवेल, रोज़ मिलेगा 9.60 लाख लीटर पानी
बीकानेर, 1 जून । बीकानेर शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले बीछवाल और शोभासर जलाशयों को अपनी पूरी क्षमता तक भरने में अभी करीब एक सप्ताह का समय और लग सकता है। नहर बंदी समाप्त हुए एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी शहर की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट पाई है, जिससे कई इलाकों में पानी की किल्लत बरकरार है।


जलाशयों की वर्तमान स्थिति और चुनौतियां
शहर के करीब 1.34 लाख उपभोक्ता इन दोनों जलाशयों पर निर्भर हैं। 1500-1500 एमएल (ML) की क्षमता वाले इन जलाशयों का स्तर नहर बंदी के दौरान काफी नीचे चला गया था। 21 मई से नहर से पानी की आवक शुरू होने के बावजूद वर्तमान में स्थिति इस प्रकार है।
बीछवाल जलाशय: वर्तमान में करीब 450 एमएल पानी। शोभासर जलाशय: वर्तमान में मात्र 12 एमएल पानी।


जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता खेमचंद सिंगारिया ने बताया कि व्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और शिकायतों में कमी आई है। उम्मीद है कि अगले एक सप्ताह में दोनों जलाशय लबालब भर जाएंगे।
PBM अस्पताल: दवा के बाद अब पानी का संकट
संभाग के सबसे बड़े पीबीएम (PBM) अस्पताल में पिछले दो महीनों से पेयजल व्यवस्था चरमराई हुई है। हालात इतने विकट हैं कि मरीजों और उनके परिजनों को शौचालयों के उपयोग के लिए भी बाजार से पानी की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं।
कैंसर सेंटर में सबसे बुरा हाल:
कैंसर सेंटर के आईसीयू तक में पानी की भारी कमी है। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि कैंसर सेंटर की टंकी में पानी चढ़ाने वाली मोटर पिछले दो माह से खराब पड़ी है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र कुमार वर्मा ने इस लापरवाही पर स्टाफ को कड़ी फटकार लगाई और मोटर को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए।
भामाशाह राठी परिवार ने बढ़ाया मदद का हाथ
अस्पताल में पानी की इस त्राहि-त्राहि के बीच एक राहत भरी खबर आई है। समाजसेवी रूप किशोर व्यास की प्रेरणा से भामाशाह राधेश्याम राठी ने अपने पूर्वजों (सूरजमल राठी, भागीरथ राठी और लक्ष्मीनारायण राठी) की स्मृति में गर्ल्स हॉस्टल के पास एक नया ट्यूबवेल बनवाया है। इस ट्यूबवेल 520 फीट गहरा है और इसमें मीठा पानी निकला है। इससे प्रति घंटे 40 हजार लीटर यानी 24 घंटे में 9.60 लाख लीटर पानी निकलने की क्षमता है ।,इस ट्यूबवेल को जनाना अस्पताल के पीछे स्थित टंकी से जोड़ा गया है और जल्द ही इसे कैंसर अस्पताल से भी जोड़ा जाएगा।
इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर के पास पुराने ट्यूबवेल को भी ठीक कराया जा रहा है। दोनों के शुरू होने से अस्पताल को रोज़ाना करीब 14.60 लाख लीटर पानी मिल सकेगा, जो अस्पताल की रोज़ाना की 10 लाख लीटर की खपत को पूरा करने के लिए पर्याप्त होगा।
जब पुरे अस्पताल में पानी को लेकर कोहराम मचा हुआ है तब प्रशासन कह रहा है की पानी मिल सकेगा अथवा ट्यूबवेल को भी ठीक कराया जा रहा है। अब तक ठीक क्यों नहीं हुआ इसकी जबाबदेही कौन स्वीकार कर रहा है। यह तो जब आग लगे तब कुआ खोदने वाली बात को चरितार्थ कर रहें हैं।


