शिक्षकों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा निदेशालय पर किया प्रदर्शन, अतिरिक्त निदेशक को सौंपा ज्ञापन
शिक्षकों की समस्याओं को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा निदेशालय पर किया प्रदर्शन, अतिरिक्त निदेशक को सौंपा ज्ञापन



बीकानेर, 19 जून। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (विद्यालय शिक्षा) जिला बीकानेर द्वारा संगठन के जिलाध्यक्ष मोहनलाल भादू एवं जिलामंत्री नरेंद्र आचार्य के नेतृत्व तथा प्रदेश सचिव रवि आचार्य के सानिध्य में आज शिक्षा निदेशालय पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षक प्रतिनिधियों ने अपनी गंभीर और तात्कालिक समस्याओं के समाधान के लिए आवाज बुलंद की।


निदेशालय पर प्रदर्शन के पश्चात शिक्षक प्रतिनिधियों ने शिक्षा निदेशक की अनुपस्थिति में अतिरिक्त निदेशक शैलेंद्र देवड़ा से मुलाकात की और शिक्षकों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निस्तारण को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर सकारात्मक चर्चा की।


ज्ञापन में उठाई गईं शिक्षकों की प्रमुख मांगें
जिलामंत्री नरेंद्र आचार्य ने ज्ञापन में शामिल मुख्य बिंदुओं की जानकारी देते हुए बताया कि संगठन ने विभाग के समक्ष निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से रखी हैं:
- जांच प्रक्रिया स्थगित करने की मांग: पे प्रोटेक्शन के मामले में वित्त विभाग से स्थिति स्पष्ट होने तक शिक्षकों की चल रही जांच प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए।
- पदों को रिक्त मानने की नीति: क्रमोन्नत विद्यालयों में विभागीय नियमों के अनुसार सभी पदों को रिक्त मानते हुए ही नए पदस्थापन किए जाएं।
- पदोन्नति का अवसर: तृतीय श्रेणी शिक्षकों और शारीरिक शिक्षकों को पूरे सेवाकाल में न्यूनतम एक पदोन्नति देने के लिए शासन को एक मजबूत प्रस्ताव भेजा जाए। इसके साथ ही उच्च माध्यमिक विद्यालयों में द्वितीय और प्रथम श्रेणी शारीरिक शिक्षकों के नए पद सृजित करने का प्रस्ताव भी सरकार को भिजवाया जाए।
- ग्रीष्मावकाश वेतन व गैर-शैक्षणिक कार्य: ग्रीष्मावकाश अवधि के वेतन भुगतान के लिए सामान्य आदेश जारी किए जाएं और विकल्प पत्र में शिथिलता दी जाए। इसके अलावा, अति-आवश्यकता होने पर ही विभागीय निर्देशों के तहत शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाए।
- अव्यवहारिक दबाव पर रोक व सीसीएल का लाभ: जिला प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले अनावश्यक और अव्यवहारिक आदेशों के कारण संस्था प्रधानों पर बनाए जाने वाले दबाव को कड़ाई से रोका जाए। साथ ही राजकीय अवकाश के दिनों में कार्य करवाने की स्थिति में नियमानुसार चाइल्ड केयर लीव (CCL) का लाभ दिया जाए।
- काउंसलिंग में पारदर्शिता: काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान संपूर्ण रिक्त पदों को बिना किसी भेदभाव के पूरी पारदर्शिता के साथ दर्शाया जाए।
शिक्षकों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता दिखाए विभाग: पदाधिकारी
इससे पूर्व प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रदेश सचिव रवि आचार्य ने कहा कि विभाग को शिक्षकों की जायज मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करना चाहिए, क्योंकि तात्कालिक समस्याओं का समाधान न होने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होती है। प्रदेश सचिव (महिला) श्रीमती चंद्रकला भादानी ने महिला शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा कि अवकाश के दिनों में कार्य कराने पर सीसीएल का लाभ मिलना शिक्षकों का अधिकार है।
उधर, जिलाध्यक्ष मोहनलाल भादू ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के बीच समन्वय की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इसका खामियाजा संस्था प्रधानों और शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है, जिसे संगठन बर्दाश्त नहीं करेगा। पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष ओमप्रकाश विश्नोई ने भी तृतीय श्रेणी शिक्षकों और शारीरिक शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नति के मुद्दे पर सरकार से राहत देने की वकालत की।
अतिरिक्त निदेशक ने दिया उचित कार्रवाई का भरोसा
शिक्षक प्रतिनिधियों की बात सुनने के बाद अतिरिक्त निदेशक शैलेंद्र देवड़ा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि शिक्षकों द्वारा उठाई गई सभी मांगें और समस्याएं गंभीर व विचारणीय हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विभाग स्तर पर इन मांगों का तकनीकी परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा उच्च स्तर की समस्याओं के समाधान हेतु सकारात्मक पहल की जाएगी।
इस प्रदर्शन और चर्चा के दौरान संगठन के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ओमप्रकाश बिश्नोई, उपाध्यक्ष सुरेश खेशवानी, उपाध्यक्ष मीरा वर्मा, रचना गुप्ता, मोनिका गौड़, ग्रामीण मंत्री विकास पंवार, पवन शर्मा, महावीर धतरवाल, विनोद पुनिया, राजशेखर हर्ष, भेरूदान सारण, अनिल सोनी, प्रदीप यादव, जगदीश मंडा और अलसीराम विश्नोई सहित बड़ी संख्या में शिक्षक प्रतिनिधि और पदाधिकारी उपस्थित रहे।


