14 भावनाओं की प्रथम चार भावनाएं जीवन परिवर्तन का आधार- मुक्तांजना श्री जी
14 भावनाओं की प्रथम चार भावनाएं जीवन परिवर्तन का आधार- मुक्तांजना श्री जी


- 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस एवं 16 अगस्त को भगवान नेमिनाथ जन्म कल्याणक महोत्सव का होगा आयोजन
बीकानेर, 06 अगस्त । श्री सुगन जी महाराज के उपाश्रय में विराजित पूज्य आई.टी. भूषणज्ञा सुरंजना श्री जी महाराज साहब की शिष्या मुक्तांजना श्री जी ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जैन धर्म में वर्णित 14 भावनाओं में से प्रथम चार भावनाएं मनुष्य के जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं। इन भावनाओं का निरंतर चिंतन व्यक्ति में वैराग्य, आत्मजागृति एवं सम्यक दृष्टि का विकास करता है तथा जीवन को धर्ममय बनाने की प्रेरणा देता है।


प्रवचन के दौरान पूज्य मुक्तांजना श्रीजी ने ‘अमीचन्द की अमी दृष्टि’ कथानक का मार्मिक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अमिचन्द का छोटा भाई वीनू अपनी पत्नी के कहने पर बड़े भाई से परिवार से अलग होने की बात कहना चाहता है, किंतु बड़े भाई के प्रति सम्मान, स्नेह और संकोच के कारण वह अपनी बात नहीं कह पाता। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने पारिवारिक संबंधों में प्रेम, मर्यादा एवं आपसी समझ की महत्ता पर प्रकाश डाला।


बीस स्थानक तपस्वियों का पारणा और आगामी कार्यक्रम
धर्मसभा में बीस स्थानक तप के अंतर्गत तपस्वियों का पारणा संपन्न हुआ। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने तपस्वियों का अभिनंदन कर उनके तप एवं संयम की भावभीनी अनुमोदना की।
संघ की ओर से आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए मनीष नाहटा ने बताया कि
रविवार को: पूज्य सुरंजना श्री जी महाराज साहब की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में “संयम संवेदना” कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
15 अगस्त को: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति से ओत-प्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
16 अगस्त को: भगवान नेमिनाथ के जन्म कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
पंजाब पुलिस के डीजीपी जितेंद्र जी मालू ने किए दर्शन
कार्यक्रम के दौरान पंजाब पुलिस के पुलिस महानिदेशक (DGP) जितेंद्र जी मालू महाराज साहब के दर्शनार्थ उपाश्रय पहुंचे। इस अवसर पर श्री सुगन जी महाराज उपाश्रय ट्रस्ट एवं संघ की ओर से उनका आत्मीय एवं भावपूर्ण स्वागत-सत्कार किया गया।


