फ्लाइट में फडणवीस और उद्धव ठाकरे के बीच गुप्त गुफ्तगू; महाराष्ट्र की राजनीति में नए ‘खेला’ की अटकलें तेज
फ्लाइट में फडणवीस और उद्धव ठाकरे के बीच गुप्त गुफ्तगू



- आसमान में टकराए महाराष्ट्र की सियासत के दो धुरंधर
नागपुर/मुंबई, 27 जून । महाराष्ट्र की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी, अप्रत्याशित और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। दो ऐसे कद्दावर नेता जो कल तक एक-दूसरे के धुर विरोधी माने जा रहे थे और जिनके बीच की तीखी सियासी जंग ने राज्य की सत्ता का तख्तापलट कर दिया था, वे अचानक आसमान में एक साथ बैठे नजर आए। मुंबई से नागपुर जाने वाली इंडिगो की एक नियमित कमर्शियल फ्लाइट में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे का आमना-सामना हुआ। इस साझा हवाई सफर के दौरान दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे की तरह हुई बातचीत को लेकर सस्पेंस अब चरम पर पहुंच गया है।


यह पूरा वाकया उस वक्त शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस अपने गृहनगर नागपुर के लिए रवाना हो रहे थे, और ठीक उसी फ्लाइट में उद्धव ठाकरे भी अपने विदर्भ दौरे की शुरुआत के लिए सवार हुए। उद्धव अकेले नहीं थे, उनके साथ उनके बेटे आदित्य ठाकरे, राज्यसभा सांसद संजय राउत और शिवसेना (UBT) के कई अन्य शीर्ष रणनीतिकार भी मौजूद थे। जैसे ही दोनों पक्षों की नजरें एक-दूसरे से मिलीं, प्लेन के भीतर का माहौल अचानक बदल गया। सूत्रों के मुताबिक, दोनों कड़े प्रतिद्वंद्वियों ने न सिर्फ गर्मजोशी से हाथ मिलाया, बल्कि उनके बीच कुछ देर के लिए बेहद गोपनीय बातचीत भी हुई। इस मुलाकात के बाद खुद देवेंद्र फडणवीस ने मुस्कुराते हुए मीडिया से कहा कि हम तीनों का एक साथ मिलना आज के दिन की सबसे बड़ी खबर है।


छह सांसदों की बगावत के तुरंत बाद मुलाकात: महज इत्तेफाक या कोई गुप्त डील?
इस साझा सफर ने राजनीतिक पंडितों के कान इसलिए खड़े कर दिए हैं, क्योंकि यह मुलाकात बेहद नाजुक मोड़ पर हुई है। हाल ही में उद्धव ठाकरे की पार्टी को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब उनके छह लोकसभा सांसद पार्टी छोड़कर अलग हो गए। सांसदों की इस खुली बगावत और बिखराव के बाद उद्धव ठाकरे का यह पहला विदर्भ दौरा था, जहां वे डैमेज कंट्रोल के लिए नागपुर जा रहे थे। ऐसे समय में जब उद्धव गहरे राजनीतिक संकट से जूझ रहे हैं, विपक्षी खेमे के सबसे बड़े सिपहसालार देवेंद्र फडणवीस के साथ उनकी इस मुलाकात के पीछे क्या कोई नया सियासी समीकरण छिपा है, यह सस्पेंस अब हर किसी के दिमाग में घूम रहा है।
‘दुश्मन नहीं, हम सिर्फ प्रतिद्वंद्वी हैं’: बीजेपी ने कयासों को किया खारिज
जैसे ही इस आसमानी मुलाकात की खबर जमीन पर फैली, सत्ताधारी महायुति गठबंधन और विशेष रूप से बीजेपी ने इसके किसी भी राजनीतिक मायने को कम करके दिखाने की कोशिशें तेज कर दीं। बीजेपी एमएलसी प्रसाद लाड ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि वे इस बात से अधिक हैरान हैं कि उद्धव ठाकरे जैसा बड़ा नेता प्राइवेट जेट छोड़कर एक सामान्य कमर्शियल फ्लाइट से यात्रा कर रहा है। लाड ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता नेताओं को दुश्मन नहीं बनाती। हम विरोधी जरूर हैं, लेकिन जानी दुश्मन नहीं हैं; हमारे बीच सौहार्दपूर्ण बातचीत होती रहती है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तमाम कड़वाहटों के बावजूद उद्धव ठाकरे उनका पारिवारिक रिश्ता निभाते हुए उनकी बेटी की शादी में शामिल हुए थे। सांसदों की बगावत पर उन्होंने साफ कहा कि यह प्रक्रिया पिछले चार महीनों से चल रही थी और इससे बीजेपी का कोई लेना-देना नहीं है।
दूसरी तरफ, शिवसेना (UBT) की फायरब्रांड नेता सुषमा अंधारे ने भी इस मुलाकात को ज्यादा तवज्जो न देते हुए इसे विशुद्ध रूप से एक ‘इत्तेफाक’ करार दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब देश में नेताओं द्वारा प्राइवेट जेट के इस्तेमाल और ईंधन बचाने की चर्चा चल रही है, तो उद्धव जी की इस कमर्शियल यात्रा को उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए, न कि किसी गुप्त राजनीतिक संकेत के तौर पर। भले ही नेता इसे सामान्य बता रहे हों, लेकिन नागपुर एयरपोर्ट का नजारा कुछ और ही बयां कर रहा था। उद्धव ठाकरे के उतरते ही वहां हजारों कार्यकर्ताओं का सैलाब उमड़ पड़ा। छह सांसदों के जाने के बाद उद्धव का यह शक्तिप्रदर्शन और फडणवीस के साथ हुई वह आसमानी मुलाकात, आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में किसी नए राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा कर रही है।


