पंजाब कांग्रेस में मनीष तिवारी की एंट्री पर विराम, हाईकमान ने लिया बड़ा फैसला

पंजाब कांग्रेस में मनीष तिवारी की एंट्री पर विराम, हाईकमान ने लिया बड़ा फैसला
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  • चंडीगढ़ सांसद होने का तर्क देकर नेतृत्व ने दी नसीहत, सोशल मीडिया पोस्ट के बाद विवादों में घिरे तिवारी ने साधी चुप्पी

चंडीगढ़, 4 जुलाई । पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त संगठन में जगह न मिलने पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताने वाले स्थानीय सांसद मनीष तिवारी को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. केंद्रीय नेतृत्व ने भौगोलिक और सांगठनिक नियमों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) है, जो पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर है. आलाकमान की ओर से आए इस कड़े और स्पष्ट संदेश के बाद अब सांसद मनीष तिवारी बैकफुट पर हैं और उन्होंने इस पूरे विवाद पर पूरी तरह से चुप्पी साध ली है.

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आलाकमान का कड़ा संदेश और पंजाब से विदाई का तर्क

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पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मनीष तिवारी को साफ शब्दों में समझाया है कि जब तक वे पंजाब के किसी संसदीय क्षेत्र (जैसे आनंदपुर साहिब) का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, तब तक उन्हें वहां के प्रदेश संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाती रही. चूंकि अब वे वर्तमान में चंडीगढ़ से सांसद हैं और वहां की स्थानीय कांग्रेस इकाई का संचालन पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से होता है, इसलिए तकनीकी और सांगठनिक रूप से उन्हें पंजाब के ढांचे में शामिल नहीं किया जा सकता.

सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व ने उन्हें यह भी याद दिलाया कि पिछले कुछ वर्षों से वे खुद चंडीगढ़ से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए लगातार पैरवी कर रहे थे. उनकी इसी इच्छा का सम्मान करते हुए पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल जैसे कद्दावर व वरिष्ठ नेता की दावेदारी को दरकिनार कर उन्हें टिकट दिया था. ऐसे में चंडीगढ़ से चुनाव जीतने के बाद अब उनके द्वारा पंजाब संगठन को लेकर असंतोष जताना पूरी तरह आधारहीन है.

सोशल मीडिया पर सांकेतिक पोस्ट से उपजा था विवाद

यह पूरा सियासी विवाद उस समय शुरू हुआ जब अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) की ओर से पंजाब कांग्रेस की नई जंबो टीम की घोषणा की गई, जिसमें मनीष तिवारी का नाम कहीं शामिल नहीं था. सूची सामने आने के कुछ ही घंटों बाद चंडीगढ़ के सांसद ने सोशल मीडिया हैंडल पर एक बेहद सांकेतिक और रहस्यमयी पोस्ट साझा की. उन्होंने हिंदी की एक प्रसिद्ध पंक्ति से शुरुआत करते हुए लिखा, “है बड़ा कोई अवगुण उसमें, जिसमें कोई हुनर आवे.” इसके आगे उन्होंने लिखा कि काश उनके पास लोगों और संस्थाओं की आंतरिक असुरक्षा (इनसिक्योरिटी) को दूर करने के लिए कोई अचूक दवा होती.

पौराणिक ताबीज का संदर्भ और मीडिया से बनाई दूरी

अपनी इस पोस्ट में मनीष तिवारी ने ‘गिद्दर सिंघी’ शब्द का प्रयोग किया, जो एक ऐसी पारंपरिक वस्तु या ताबीज माना जाता है जिसके बारे में समाज में यह भ्रांति है कि वह चमत्कारी शक्तियां देता है. उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों ने सीधे तौर पर पंजाब कांग्रेस के वर्तमान शीर्ष नेताओं की आंतरिक असुरक्षा की भावना पर किया गया तीखा तंज माना था. हालांकि, दिल्ली दरबार (केंद्रीय आलाकमान) की तरफ से आई कड़ी फटकार और स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद सांसद के सुर पूरी तरह बदल गए हैं. अब वे इस मुद्दे पर मीडिया के कैमरों और तीखे सवालों का सामना करने से साफ बच रहे हैं और खुद को इस पूरे विवाद से पूरी तरह दूर कर लिया है।

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