एमजीएसयू की लापरवाही से परेशान हुए बीएड कॉलेज: यूनिवर्सिटी ने अंतिम क्षणों में जारी की NOC, काउंसलिंग से बाहर होने से बचे कॉलेज

एमजीएसयू की लापरवाही से परेशान हुए बीएड कॉलेज: यूनिवर्सिटी ने अंतिम क्षणों में जारी की NOC, काउंसलिंग से बाहर होने से बचे कॉलेज
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STBA 5 JUNE 2026

वीएमओयू कोटा द्वारा प्रोफाइल भरने की अंतिम तिथि के दिन घंटों इंतजार के बाद मिली एनओसी, चार जिलों के कॉलेज संचालकों ने जताई नाराजगी

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बीकानेर, 4 जुलाई । पीटीईटी-2026 (PTET) काउंसलिंग प्रक्रिया के दौरान महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय (MGSU) की ढीली कार्यशैली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है. कोटा के वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU) द्वारा कॉलेजों के लिए प्रोफाइल भरने की तिथि दो बार बढ़ाए जाने के बावजूद, एमजीएसयू प्रशासन समय पर संबद्ध बी.एड. (B.Ed.) कॉलेजों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने में नाकाम रहा। प्रोफाइल अपलोड करने की बिल्कुल अंतिम तिथि के दिन घंटों चले मानसिक तनाव और इंतजार के बाद, विश्वविद्यालय ने अंतिम क्षणों में एनओसी जारी की। इससे बीकानेर संभाग के चार जिलों के बीएड कॉलेजों को बड़ी राहत तो मिली, लेकिन प्रशासनिक लेतीफी को लेकर रोष व्याप्त है।

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क्या है पूरा मामला और क्यों उपजा असमंजस?

इस वर्ष पीटीईटी-2026 की राज्य स्तरीय काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया का संपूर्ण जिम्मा वीएमओयू, कोटा के पास है. नियमानुसार, प्रवेश प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों को ऑनलाइन प्रोफाइल भरकर कॉलेजों की चॉइस (विकल्प) भरनी होती है. इस काउंसलिंग पोर्टल पर अभ्यर्थियों को कॉलेज तभी विकल्प के रूप में दिखते हैं, जब संबंधित यूनिवर्सिटी द्वारा उन कॉलेजों की एनओसी पोर्टल पर समय रहते अपलोड कर दी जाए।

संबद्ध कॉलेज संचालकों का साफ कहना है कि उन्होंने विश्वविद्यालय के नियमानुसार समय रहते अपने सभी दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन और आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कर दी थीं। इसके बावजूद एमजीएसयू के परीक्षा और अकादमिक अनुभाग द्वारा एनओसी जारी करने में अनावश्यक और अत्यधिक देरी की गई। अंतिम तिथि के दिन दोपहर बाद तक भी पोर्टल पर एनओसी अपडेट नहीं होने से बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जिले के बीएड कॉलेजों में भारी असमंजस और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

काउंसलिंग से बाहर होने का मंडरा रहा था खतरा

विभिन्न शिक्षण संस्थानों और कॉलेज संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, यदि विश्वविद्यालय ऐन वक्त पर एनओसी जारी नहीं करता, तो इन चारों जिलों के दर्जनों बीएड कॉलेज पीटीईटी की प्रथम काउंसलिंग सूची (First Counseling List) से पूरी तरह बाहर हो जाते। इसका सीधा असर यह होता कि हजारों छात्र इन कॉलेजों को अपनी चॉइस में नहीं चुन पाते। संचालकों ने चिंता जताते हुए कहा कि राज्य में पहले से ही बीएड कोर्स में प्रवेश का ग्राफ लगातार गिर रहा है और सीटें खाली रह रही हैं; ऐसे दौर में विश्वविद्यालय की इस प्रकार की गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और ढिलाई निजी व राजकीय कॉलेजों के लिए और अधिक आर्थिक व सांगठनिक नुकसानदायक साबित हो सकती थी।

हालांकि, चौतरफा दबाव के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतिम क्षणों में एनओसी की पट्टिका पोर्टल पर लाइव कर दी, जिससे संकट टल गया. इस राहत के बावजूद कॉलेज संचालकों ने कुलपति और कुलसचिव से मांग की है कि भविष्य में ऐसी गैर-जिम्मेदाराना स्थिति दोबारा पैदा नहीं होनी चाहिए, ताकि युवाओं की प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध, पारदर्शी और बिना किसी मानसिक अनिश्चितता के सुचारू रूप से पूरी हो सके।

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