वाणी संयम से जीवन में आती है मधुरता और समता- मुनि आकाश कुमार

वाणी संयम से जीवन में आती है मधुरता और समता- मुनि आकाश कुमार
STBA 5 JUNE 2026
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  • आर.आर. नगर में मनाया गया वाणी संयम दिवस

बेंगलुरु ,11 सितंबर। पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व का चतुर्थ दिवस आर.आर. नगर स्थित तेरापंथ भवन में मुनि श्री आकाश कुमार जी एवं मुनि श्री हितेंद्र कुमार जी के पावन सान्निध्य में ‘वाणी संयम दिवस’ के रूप में अत्यंत श्रद्धा और आध्यात्मिक भावों के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान और प्रवचन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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संतों का पावन बोध: वाणी का विवेक और जयाचार्य का स्मरण

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मुनि आकाश कुमार जी: उन्होंने वाणी के विवेक पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “बोलना एक कला है, किंतु न बोलना एक साधना है।” वाणी पर संयम रखना मानव जीवन का सच्चा आभूषण है, जबकि वाचालता एक दुर्गुण है। हमारी भाषा और शब्द ही संबंधों को मधुर बनाते हैं और असंयमित वाणी विवाद का कारण बनती है। रामायण और महाभारत जैसे ऐतिहासिक महाकाव्य भी वाणी के प्रभाव को दर्शाते हैं। इसलिए सदैव विचारपूर्वक, मधुर, मित और विवेकपूर्ण वाणी का प्रयोग करना चाहिए।

मुनि हितेंद्र कुमार जी: उन्होंने तेरापंथ धर्मसंघ के चतुर्थ पट्टधर श्रीमद् जयाचार्य के जीवन एवं कर्तृत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जयाचार्य को आचार्य भिक्षु का अवतार माना जाता था। उन्होंने अपने कुशल नेतृत्व, दूरदर्शिता और संगठनात्मक नवाचारों से धर्मसंघ को नए आयाम प्रदान किए और संघ के विकास को अप्रतिम गति दी।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रात्रिकालीन आयोजन

ज्ञानशाला की सहभागिता: वाणी संयम दिवस के अवसर पर ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं द्वारा सुमधुर भावपूर्ण गीत की प्रस्तुति दी गई। ज्ञानशाला संयोजिका श्रीमती नीतु बाफना ने मौन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को दैनिक जीवन में वाणी संयम अपनाने की प्रेरणा दी।

दीक्षा प्रसंग व प्रतिक्रमण: रात्रिकालीन सत्र में मुनि श्री आकाश कुमार जी एवं मुनि श्री हितेंद्र कुमार जी के वैराग्य एवं दीक्षा ग्रहण से संबंधित प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन रखा गया। प्रतिदिन सांयकालीन प्रतिक्रमण में श्रावक-श्राविकाएं बड़ी संख्या में उपस्थित होकर साधना कर रहे हैं।