समता का साधक स्वतंत्र होता है परतंत्र नहीं: साध्वी श्री उदितयशा जी
समता का साधक स्वतंत्र होता है परतंत्र नहीं- साध्वी श्री उदितयशा जी


- किलपौक चेन्नई में अभिनव सामायिक का आयोजन
चेन्नई ,10 सितंबर । अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) के निर्देशन में तेरापंथ युवक परिषद (तेयुप) किलपौक, चेन्नई के तत्वावधान में पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के ‘सामायिक दिवस’ के उपलक्ष्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया गया। इस अवसर पर साध्वी श्री उदितयशा जी के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक साधना और समता का अभ्यास किया।


साध्वीवृंद का पावन बोध एवं प्रयोग
साध्वी श्री उदितयशा जी: उन्होंने सामायिक के आध्यात्मिक रहस्य को उजागर करते हुए फरमाया कि जब व्यक्ति अपनी आत्मा-राज्य की मर्यादा का उल्लंघन करता है, तब वह विषमता और परतंत्रता में फंस जाता है। वहीं, मर्यादा की सीमा में रहकर जीवन जीने से समता प्राप्त होती है। समता का साधक सदैव स्वतंत्र होता है, परतंत्र नहीं। सामायिक आत्मा को समता और आंतरिक संतुलन की ओर ले जाने का सच्चा मार्ग है।


साध्वी श्री संगीतप्रभा जी: उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को ‘अभिनव सामायिक’ का अत्यंत प्रभावशाली, सुव्यवस्थित एवं आध्यात्मिक प्रयोग करवाया, जिससे संपूर्ण वातावरण ध्यानमय हो गया।
साध्वी श्री भव्ययशा जी व साध्वी श्री शिक्षाप्रभा जी: साध्वीद्वय ने जैन परंपरा के मूल मंत्र ‘नमस्कार महामंत्र’ के अमित महिमा और महत्व पर आधारित सुमधुर एवं भक्तिपूर्ण गीतिका का संगान किया।
अभिनव सामायिक में श्रावकों का उत्साह
तेरापंथ युवक परिषद किलपौक द्वारा आयोजित इस सामायिक दिवस के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया। अभातेयुप के इस विशेष उपक्रम के माध्यम से श्रद्धालुओं ने नियम, जप, ध्यान और समता की साधना कर पर्युषण पर्व के तीसरे दिन को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सार्थक बनाया।
