बेंगलुरु के आर.आर. नगर तेरापंथ भवन में श्रद्धा के साथ मनाया गया क्षमापना पर्व
बेंगलुरु के आर.आर. नगर तेरापंथ भवन में श्रद्धा के साथ मनाया गया क्षमापना पर्व


बेंगलुरु, 16 सितम्बर । पर्वाधिराज पर्युषण महापर्व के समापन अवसर पर बेंगलुरु के आर.आर. नगर स्थित तेरापंथ भवन में क्षमापना पर्व श्रद्धा, आध्यात्मिकता एवं आत्मचिंतन के वातावरण में आयोजित किया गया। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के आशीर्वाद तथा मुनि श्री आकाश कुमार जी एवं सहवर्ती मुनि श्री हितेन्द्र कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने भाग लिया।


क्षमा कायरों का नहीं, वीरों का आभूषण: मुनि श्री आकाश कुमार जी
कर्ममुक्ति का मार्ग: मुनि श्री आकाश कुमार जी ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब शिष्य ने गुरु से ग्रंथि-विमोचन और आत्मा को कर्मों से हल्का करने का उपाय पूछा, तो गुरु का उत्तर ‘क्षमा’ था।


समस्याओं का समाधान: उन्होंने कहा कि मन में क्षमाभाव रहने पर बड़ी से बड़ी समस्या का समाधान संभव हो जाता है। क्षमा कायरों का नहीं, बल्कि वीरों का आभूषण है, जिसका प्रभाव मनुष्य के जीवन और स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
संवत्सरी साधना: संवत्सरी के अवसर पर लगभग 126 श्रावक-श्राविकाओं ने पौषध व्रत की साधना की।
नम्रता ही महानता की कुंजी: मुनि श्री हितेन्द्र कुमार जी
दुर्लभ परंपरा: सहवर्ती मुनि श्री हितेन्द्र कुमार जी ने कहा कि जो नमना जानता है, वही जीवन में महान बनता है। क्षमा को एक पर्व के रूप में मनाने की ऐसी महान परंपरा विश्व में अत्यंत दुर्लभ है।
श्रावक समाज ने भावपूर्वक किया ‘खमत-खामणा’
समारोह के दौरान समाज के विभिन्न संस्था प्रमुखों ने लाडनूं स्थित आचार्य श्री महाश्रमण जी एवं बेंगलुरु के समस्त श्रावक-श्राविकाओं से भावपूर्वक खमत-खामणा करते हुए क्षमायाचना की। कमल दुगड़ (अध्यक्ष, श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा), राकेश छाजेड़ (अध्यक्ष, तेरापंथ ट्रस्ट), सरल पटावरी (अध्यक्ष, तेरापंथ युवक परिषद), मंजु बोथरा (अध्यक्ष, तेरापंथ महिला मंडल), संजय बैद (अध्यक्ष, राजस्थान परिषद) .
मुनिद्वय ने भी उपस्थित जनसमुदाय से क्षमायाचना करते हुए सभी के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना व्यक्त की।
मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का सुमधुर एवं प्रभावी मंच संचालन दिनेश मरोठी ने किया। अंत में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के मंत्री अमित नौलखा ने उपस्थित अतिथियों, संतों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। संपूर्ण वातावरण क्षमा, मैत्री और आत्मचिंतन की पावन भावना से ओतप्रोत रहा।
