24 कैरेट सोने और चांदी के वर्क से सजे आराध्य, 15 दिन में तैयार हुआ भव्य श्रृंगार
24 कैरेट सोने और चांदी के वर्क से सजे आराध्य, 15 दिन में तैयार हुआ भव्य श्रृंगार



- नौ दिनों तक आरती के बाद देश-प्रदेश के नामचीन कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां, आज महाआरती के बाद महाप्रसादी का आयोजन
बीकानेर, 23 सितंबर। धार्मिक आस्था, कला और संस्कृति के अद्भुत संगम के रूप में आयोजित विशेष धार्मिक कार्यक्रम में आराध्य का भव्य श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस विशेष श्रृंगार में 24 कैरेट शुद्ध सोने के लगभग 21 वर्क तथा चांदी के 100 से अधिक वर्क का इस्तेमाल किया गया है। इस मनमोहक श्रृंगार को तैयार करने में करीब 15 दिनों का समय लगा। विशेष बात यह है कि इस पूरे श्रृंगार को कलाकार शिव-विजय श्रीमाली ने स्वयं तैयार किया है।


सोने और चांदी के वर्क से तैयार किए गए इस विशेष श्रृंगार में कलाकार ने बारीक कलाकारी का परिचय देते हुए धार्मिक भावनाओं के साथ कला का सुंदर समन्वय किया है। श्रृंगार के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और श्रद्धालुओं के बीच यह विशेष आकर्षण का विषय बना हुआ है।


नौ दिनों तक कलाकारों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
आयोजन के दौरान पिछले नौ दिनों से लगातार रात 8:30 बजे होने वाली आरती के बाद बीकानेर सहित प्रदेश और देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नामचीन कलाकारों ने स्वप्रेरणा से अपनी प्रस्तुतियां देकर धार्मिक आयोजन को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।
इन प्रस्तुतियों में मास्टर भंवर अली, नरोत्तम रंगा, आनंद सेन, यश श्रीमाली, भानु दवे, वेणुगोपाल पुरोहित, कमल श्रीमाली सहित अनेक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। वहीं अजमेर से गोरख तिवारी, कोलकाता से सत्यनारायण जी तथा जयपुर से नीरज जैन सहित अन्य कलाकारों ने भी अपनी हाजिरी लगाकर श्रद्धालुओं को अपनी कला से भावविभोर किया।
लगातार नौ दिनों तक चले इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कलाकारों ने भक्ति संगीत और अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाए रखा। कलाकारों की स्वप्रेरित भागीदारी आयोजन की विशेषता रही।
आज महाआरती के बाद महाप्रसादी
आयोजन के समापन अवसर पर आज 23 सितंबर 2026 को महाआरती का आयोजन किया जाएगा। महाआरती के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है। आयोजन समिति की ओर से श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर महाआरती में शामिल होने और महाप्रसादी ग्रहण करने का आग्रह किया गया है। धार्मिक आयोजन के दौरान भक्ति, संगीत और कला के इस अनूठे संगम ने बीकानेर की सांस्कृतिक परंपरा को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया है।
