साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी के सान्निध्य में मनाया गया 224वां भिक्षु चरमोत्सव
साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी के सान्निध्य में मनाया गया 224वां भिक्षु चरमोत्सव




- भिक्षु स्वामी के विचारों को बताया अनुकरणीय
गंगाशहर (बीकानेर), 24 सितंबर। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ युवक परिषद्, गंगाशहर के तत्वावधान में स्थानीय तेरापंथ भवन में साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी के पावन सान्निध्य में 224वां भिक्षु चरमोत्सव अत्यंत भव्यता एवं गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ “ओम् भिक्षु ओम् भिक्षु स्वामी दीपां के दुलारे, प्यारे प्रभु अन्तर्यामी” की सुमधुर संगीतमय धुन के साथ हुआ।


समारोह को संबोधित करते हुए साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी ने कहा कि आचार्य भिक्षु विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने “मर पूरा देस्यां पर आतमा रा कारज सारस्यां” के महान संकल्प के साथ आध्यात्मिक क्षेत्र में कदम रखा। उन्होंने सत्य की खोज और मर्यादा की रक्षा के लिए अनेक संघर्षों और विरोधी तूफानों का सामना किया। वे आदर्शों की बोलती तस्वीर थे और जीवन के अंतिम क्षणों तक सतत पुरुषार्थ करते हुए अनुकरणीय जीवन जीया।


साध्वी सम्यक्त्वयशा जी ने आचार्य भिक्षु के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि उनकी प्रतिभा बेजोड़ और साधना अद्वितीय थी। उनके प्रभाव से विरोधी भी नतमस्तक हो जाते थे। वहीं साध्वीश्री कल्पयशा जी ने उनके दूरदर्शी विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब व्यक्तिगत चेला-चेली बनाने की परंपरा चरम पर थी, तब आचार्य भिक्षु ने ‘एक आचार्य, एक आचार और एक विचार’ का ऐतिहासिक सूत्रपात किया। इसके अलावा साध्वीश्री रश्मिप्रभा जी ने भावपूर्ण गीतिका प्रस्तुत की।
समारोह में विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी स्वामी जी को अपनी श्रद्धांजली अर्पित की। तेरापंथ सभा की ओर से पवन छाजेड़, महिला मंडल की ओर से संजु लालाणी, तेरापंथ युवक परिषद् के अध्यक्ष देवेंद्र डागा तथा अणुव्रत समिति के अध्यक्ष करणीदान रांका ने कविता एवं गीतिका के माध्यम से अपनी भावांजलि दी। कार्यक्रम का सफल संचालन साध्वी कल्पयशा जी द्वारा किया गया।
