अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित युवा फोटो पत्रकार अजीज भुट्टा का सम्मान
अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित युवा फोटो पत्रकार अजीज भुट्टा का सम्मान



बीकानेर, 30 सितम्बर । नगर की विभिन्न सामाजिक व साहित्यिक संस्थाओं द्वारा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित बीकानेर के ख्यातनाम युवा फोटो पत्रकार अजीज भुट्टा का एक विशेष समारोह में भावभीना अभिनंदन एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने अजीज भुट्टा की उत्कृष्ट छायांकन कला, निष्ठा और तीन दशकों की पत्रकारिता यात्रा व उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।


एक चित्र हजार शब्दों को बयां करता है – राजेंद्र जोशी


मुक्ति संस्था के सचिव राजेंद्र जोशी ने कहा कि एक चित्र हजार शब्दों से अधिक असरदार होता है। अजीज भुट्टा द्वारा कैमरे में कैद किए गए छायाचित्र मूक नहीं, बल्कि पूरी तरह जीवंत प्रतीत होते हैं। उन्होंने कहा कि पर्व-त्योहार, घटना-दुर्घटना और आम जनजीवन से जुड़े उनके चित्र एक मुकम्मल कहानी प्रस्तुत करते हैं। भुट्टा ने अपने श्वेत-श्याम (ब्लैक एंड व्हाइट) और रंगीन छायाचित्रों से पाठकों व दर्शकों को लगातार आकर्षित किया है।
‘बवंडर’ का ऐतिहासिक फोटो और अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल
शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के संयोजक अशफाक कादरी ने कहा कि अजीज भुट्टा ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बीकानेर का नाम रोशन किया है। उन्होंने बताया कि जुलाई 2005 में बीकानेर में आए विनाशकारी बवंडर का अजीज द्वारा खींचा गया ऐतिहासिक फोटो ‘बवंडर’ हाल ही में 21 साल का हो गया है। इस दुर्लभ चित्र के लिए उन्हें मलेशिया में एशिया का प्रतिष्ठित ‘इफ्रो एशिया अवॉर्ड’ (अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल) प्रदान किया गया था। इसके अतिरिक्त उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
इतिहास को संजोने और प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम
शब्दरंग के सचिव कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार ने अजीज भुट्टा को बीकानेर की शान बताते हुए कहा कि वे विगत तीन दशकों से अपने कैमरे के माध्यम से सामाजिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और जन-सरोकारों से जुड़े विषयों को प्रभावशाली ढंग से दुनिया के सामने रख रहे हैं। उनकी तस्वीरें समाचारों का दस्तावेज होने के साथ इतिहास को संजोने का काम करती हैं।
मरू नवकिरण मंच के संयोजक डॉ. अजय जोशी ने कहा कि अजीज भुट्टा बीकानेर की माटी से जुड़े ऐसे छायाकार हैं, जिनके चित्रों में यहाँ की अनूठी संस्कृति साफ झलकती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अजीज ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वर्ष 2000 से 2007 तक बीकानेर एवं गंगाशहर में फोटोग्राफी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए, जिनसे हजारों युवाओं ने फोटोग्राफी के गुर सीखकर लाभ उठाया।
