भगवान महावीर स्वामी के दीक्षा दिवस को ‘संयम दिवस’ के रूप में मनाने का आचार्य श्री रामलालजी ने दिया संदेश
भगवान महावीर स्वामी के दीक्षा दिवस को 'संयम दिवस' के रूप में मनाने का आचार्य श्री रामलालजी ने दिया संदेश

- 9 अप्रैल को नवकार महामंत्र दिवस मनाने और संघ भेदों से ऊपर उठकर एकजुटता का किया आह्वान, 208 से अधिक श्रावकों ने कायाक्लेश तप से कराया लोच
बीकानेर, 06 अक्टूबर । साधुमार्गी जैन संघ के नवम पट्टधर आचार्य श्री रामलालजी एवं उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि जी ने छबीली घाटी स्थित सेवा सदन में आयोजित चातुर्मास ‘समर्पण’ कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न अंचलों से पधारे सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं को भगवान महावीर स्वामी के दीक्षा दिवस (3 दिसंबर 2026) को ‘संयम दिवस’ के रूप में मनाने की पावन प्रेरणा दी। आचार्यश्री के इस संदेश पर उपस्थित विशाल जनसमूह ने सहर्ष संयम दिवस मनाने का संकल्प (पचखाण) ग्रहण किया।


जैन एकता और नवकार महामंत्र जाप का दिया संदेश


साधुमार्गी जैन संघ के मीडिया प्रभारी अमित गोलछा ने बताया कि आचार्यश्री एवं उपाध्याय प्रवर ने समस्त जैन समाज को एकजुट करने हेतु तीन प्रमुख प्रेरणाएं प्रदान कीं। उन्होंने कहा कि आगामी 9 अप्रैल को प्रतिवर्ष ‘नौ चार जपा नवकार’ दिवस के रूप में मनाते हुए अधिकाधिक संख्या में नवकार महामंत्र का जाप करें। साथ ही, किसी भी सम्प्रदाय अथवा गच्छ (तेरापंथ, स्थानकवासी, श्वेताम्बर या दिगम्बर) के साधु-साध्वी भगवंत के देवलोकगमन पर श्रद्धांजलि स्वरूप 11 माला नवकार महामंत्र का जाप करने का आह्वान किया। आचार्यश्री ने बताया कि जन्म व निर्वाण कल्याणक की भांति दीक्षा कल्याणक का भी विशेष महत्व है, जिसे अब संयम दिवस के रूप में भव्य रूप से मनाया जाएगा।
मासक्षमण तपस्याओं की जयकारों के साथ हुई अनुमोदना
समारोह के दौरान साधुमार्गी जैन सेवा समिति के मंत्री की धर्मपत्नी कनक देवी बच्छावत, प्रसिद्ध गायिका अलका डागा तथा कन्हैयालाल-इंद्रा बैद की पुत्री द्वारा की गई मासक्षमण (एक माह का कठिन निराहार तप) तपस्या की ‘हर्ष-हर्ष, जय-जय’ के गगनभेदी नारों के साथ अनुमोदना की गई। अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि तपस्वियों के दीर्घ तप और संयम जीवन की श्रावक-श्राविकाओं ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
208 से अधिक श्रावकों ने कायाक्लेश तप से कराया बालों का लोच
चातुर्मास स्थल पर कायाक्लेश तप के अंतर्गत श्रावकों द्वारा हाथों से सिर के बालों का लोच (केशलोच) करवाने का अनोखा अनुष्ठान जारी है, जिसके तहत अब तक 208 से अधिक श्रावक अपने कर्मों की निर्जरा हेतु लोच करवा चुके हैं। इसमें युवाओं की उत्साहजनक भागीदारी देखने को मिल रही है। मध्य प्रदेश से आए पारंपरिक कारीगर राख के उपयोग से प्रामाणिक पद्धति द्वारा यह लोच संपन्न करवा रहे हैं।
