

चेन्नई,11 मई। अणुव्रत समिति, चेन्नई द्वारा रविवार को पुरूषवाक्कम स्थित सी.यू. शाह भवन में ‘स्वस्थ समाज के निर्माण में सामाजिक संस्थाओं की भूमिका’ विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में चेन्नई की विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं ने एक मंच पर आकर समाज सुधार के संकल्प को दोहराया।


अणुव्रत: व्यक्ति से समष्टि तक का सफर
संगोष्ठी का शुभारंभ आचार्य तुलसी रचित अणुव्रत गीत ‘संयममय जीवन हो’ के सामूहिक संगान से हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और जीतो (JITO) चेन्नई चैप्टर के अध्यक्ष राजेश चंदन ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य तुलसी ने 75 वर्ष पूर्व जिस अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया था, उसका उद्देश्य सर्व समाज का कल्याण था। उन्होंने जोर देकर कहा कि “अणुव्रत” यानी छोटे-छोटे नियम व्यक्ति के चरित्र का निर्माण करते हैं और यही नियम समाज व विभिन्न संस्कृतियों को आपस में जोड़ने का सेतु बनते हैं।



स्वार्थ, परार्थ और परमार्थ का संगम
समिति की अध्यक्षा सुभद्रा लुणावत ने स्वागत भाषण में संगोष्ठी के मुख्य बिंदुओं—स्वार्थ (स्वयं का निखार), परार्थ (परिवार व समाज का निखार) और परमार्थ (चेतना का निखार) पर विस्तार से प्रकाश डाला। वहीं, अणुविभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कैलाश बोराणा ने अणुव्रत आचार संहिता का वाचन करते हुए चेन्नई समिति की इस पहल को अभिनव बताया।
नशामुक्ति और आचरण पर बल
मुख्य वक्ता राकेश खटेड़ ने ‘देहरी-दीपक न्याय’ का उदाहरण देते हुए कहा कि अणुव्रत व्यक्ति के आंतरिक और बाहरी, दोनों स्वरूपों को आलोकित करता है। ‘एलीवेट’ के राष्ट्रीय प्रभारी मुदित भंसाली ने नशामुक्ति पर प्रभावी प्रस्तुति देते हुए कहा कि समर्थ समाज के लिए व्यसन-मुक्त जीवनशैली अनिवार्य है।
प्रमुख सुझाव और सहभागिता
तमिल पत्रिका की बहाली: तमिलनाडु अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य पी. राजेन्द्रप्रसाद जैन ने तमिल भाषा में ‘अणुव्रतम्’ पत्रिका को पुनः शुरू करने का सुझाव दिया, जिस पर जैन महासंघ के अध्यक्ष प्यारेलाल पितलिया ने सकारात्मक आश्वासन दिया।
ऐतिहासिक संदर्भ: कार्यक्रम संयोजक डॉ. दिलीप धींग ने तीर्थंकर महावीर के पांच अणुव्रतों से लेकर बुद्ध के पंचशील और आचार्य तुलसी के आंदोलन तक के ऐतिहासिक क्रम को रेखांकित किया।
विविध संस्थाओं की उपस्थिति
इस अवसर पर श्वेतांबर मूर्तिपूजक, स्थानकवासी समाज, अग्रवाल, माहेश्वरी, आर्य समाज, महावीर इंटरनेशनल, आरएसएस (RSS), और जैन लेखक मंच सहित दर्जनों संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन उपाध्यक्ष स्वरूप चन्द दाँती व राजेश सुराणा ने किया और मंत्री कुशल बांठिया ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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