गंगाशहर में वर्षीतप अभिनंदन समारोह का भव्य आयोजन में तप और जप का संगम
गंगाशहर में वर्षीतप अभिनंदन समारोह का भव्य आयोजन


बीकानेर\ गंगाशहर , 19 अप्रैल। जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, गंगाशहर के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय वर्षीतप अभिनंदन समारोह का तीसरा दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मुनि श्री अमृत कुमार जी के पावन सान्निध्य में बोथरा भवन, गंगाशहर में आयोजित इस कार्यक्रम में तपस्वियों की महिमा का गुणगान किया गया और उनके आत्मबल की सराहना की गई।



तप: आत्मा की शुद्धि और स्वास्थ्य का आधार
मुख्य प्रवचन में मुनि श्री अमृत कुमार जी ने वर्षीतप के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लाखों वर्ष पूर्व भगवान ऋषभदेव द्वारा किए गए निरंतर चौविहार तप की स्मृति में आज भी श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा के साथ इस आराधना को कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान ऋषभ के वर्ष भर का निरंतर चौविहार तप के उपलक्ष्य में किए जाने वाला व्रत है। जिसे वर्षीतप कहा जाता है। लाखों करोड़ों वर्षों पूर्व भगवान ऋषभ ने यह अपूर्व तप किया था। उसकी महिमा युगों युगों से चली आ रही है। आज भी बड़ी श्रद्धा समर्पण और मनोबल के साथ भाई-बहन वर्षीतप की आराधना में संलग्न है और बड़ी प्रसन्नता और आनंद का अनुभव करते हैं।


मुनिश्री ने कहा कि वर्षीतप के प्रति जनता के मन में बड़ा जबरदस्त उत्साह झलक रहा है। इसको देखकर ऐसा लगता है कि जिन्होंने भी इस कार्यक्रम का रसास्वादन लिया है उनके मन में यह जरूर आया होगा कि हमें भी एक बार वर्षीतप आराधना करनी चाहिए। यही इस विशुद्ध आध्यात्मिक समारोह की सफलता है। बुद्धिस्य सारम् तत्व विचारम् च देहस्य सारम् तपस्य धारणम् अथार्त बुद्धि का सार है तत्व का विचार करना, तन का सार है तपस्या करना। यह विशुद्ध आध्यात्मिक कार्यक्रम है तप अनुष्ठान के साथ जप का अनुष्ठान भी बढे। तप और जप का मणि कांचन योग है। जो गंगाशहर में चरितार्थ हो रहा है।
मुनि श्री ने आयुर्वेद के जनक महर्षि चरक के हवाले से कहा कि तप केवल आध्यात्मिक मार्ग नहीं, बल्कि सर्वोत्तम औषधि भी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तपस्या से न केवल कर्मों की निर्जरा होती है, बल्कि शरीर की शुद्धि भी होती है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियाँ भी परास्त हो सकती हैं।
आज हुआ 19 तपस्वियों का भावभीना अभिनंदन
समारोह के दौरान तेरापंथी सभा द्वारा 19 तपस्वियों का विशेष सम्मान किया गया। सम्मानित होने वाले तपस्वियों में जेठमल डाकलिया, सुधा भूरा, सुनीता भंसाली, संजू लालाणी, प्रवीणा बोथरा, सुनीता डोसी, अंजय लता भूरा, प्रेम बोथरा, किरण देवी लालाणी, हिमांशी बोथरा, मधु देवी बोथरा, चंदा देवी नाहर, गुलाब देवी भंसाली, जतन लाल दुगड़, सरोज दुगड़, लीला देवी मिन्नी, विमला देवी छाजेड़ , शशि देवी सेठिया, रतन देवी सेठिया और विमला देवी भंसाली शामिल रहीं। इस तरह तीन दिनों में 46 तपसियों का तेरापंथी सभा ने अभिनन्दन किया गया।
तपस्वी जनों के परिवारों की ओर से भी तपस्या के उपलक्ष्य में भजन, गीत, मुक्तकों, एवं वक्तव्यों से तपस्या की अनुमोदना की। रवि डाकलिया व आराध्या गोलछा ने मंगलाचरण गीत प्रस्तुत किया।

तेरापंथी सभा की ओर से अध्यक्ष नवरतन बोथरा,पूर्व अध्यक्ष अमर चन्द सोनी,महासभा संरक्षक जैन लूणकरण छाजेड़, मंत्री जतनलाल संचेती, उपाध्यक्ष पवन छाजेड़, मंत्री जतनलाल संचेती , संगठन मंत्री कमल भंसाली, सह मंत्री शान्ति लाल पुगलिया, टीपीएफ से जयचंद लाल मालू, नारायण चोपड़ा, हनुमान सेठिया, मनोहर लाल नाहटा, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती प्रेम बोथरा,पूर्व अध्यक्ष मंजू आंचलिया, संतोष बोथरा, बिन्दु छाजेड़, कनक गौलछा, रुचि छाजेड़ आदि कार्यकर्ताओं ने तपस्वी जनों के अभिनन्दन साहित्य, मोमेंटो, एवं पताका पहनाकर किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अनुमोदना
तपस्वियों के परिवारों ने भजनों, गीतों और मुक्तकों के माध्यम से तपस्या की भावपूर्ण अनुमोदना की। कार्यक्रम का शुभारंभ रवि डाकलिया और आराध्या गोलछा द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण गीत से हुआ। समारोह में महिला मंडल की पदाधिकारी और टीपीएफ के सदस्यों सहित समाज के गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन रतन लाल छलाणी द्वारा किया गया।

अक्षय तृतीया को होगा मुख्य पारणा समारोह
वर्षीतप के इस त्रि-दिवसीय आयोजन का मुख्य पारणा समारोह कल शांतिनिकेतन सेवा केंद्र में साध्वी श्री त्रिशला कुमार जी के सान्निध्य में आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर साध्वी श्री दीपमाला जी (तृतीय वर्षीतप) और साध्वी श्री कल्पयशा जी (पांचवां वर्षीतप) के साथ गंगाशहर समाज के कुल 45 वर्षीतप धारक अपने तप का पारणा करेंगे। इनमें से कई तपस्वीगण आचार्य श्री महाश्रमण जी के सान्निध्य में लाडनूं जैन विश्व भारती में पारणा करने जाएंगे।
