गंगाशहर में ‘फर्जी मुकदमे’ पर बवाल: मोहल्लेवासियों ने एसपी से लगाई गुहार, कहा- “पारिवारिक झगड़े में निर्दोष पड़ोसियों को फंसाया”

गंगाशहर में 'फर्जी मुकदमे' पर बवाल
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quicjZaps 15 sept 2025
STBA 5 JUNE 2026

बीकानेर, 19 दिसम्बर। बीकानेर के गंगाशहर थाना क्षेत्र में दर्ज एक एफआईआर (FIR) को लेकर मोहल्लेवासियों और एक परिवार के बीच विवाद अब पुलिस अधीक्षक (SP) के द्वार तक पहुँच गया है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में मोहल्लेवासियों ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और निर्दोष लोगों को राहत देने की पुरजोर मांग की है। निवासियों का आरोप है कि आपसी रंजिश और पारिवारिक कलह के चलते पूरे मोहल्ले को जानबूझकर कानूनी पेचीदगियों में उलझाया जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
मोहल्लेवासियों द्वारा सौंपे गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, यह विवाद 3 दिसंबर को शुरू हुआ था। आरोप है कि सुजानदेसर निवासी राकेश, मांगीलाल, मुकेश, कांता और राधा देवी सहित परिवार के अन्य सदस्य गली में अपने किसी पारिवारिक मुद्दे को लेकर जोर-जोर से झगड़ा और गाली-गलौज कर रहे थे। इस शोर-शराबे से मोहल्ले में अशांति फैल गई और लोग वहां एकत्र हो गए। जब पड़ोसियों ने उन्हें रोज-रोज होने वाले इस हंगामे से मना किया, तो संबंधित पक्ष आक्रोशित हो गया और कथित तौर पर बदला लेने की नीयत से मोहल्ले के लोगों के खिलाफ पुलिस में झूठा मुकदमा दर्ज करवा दिया।
“दहशत और रंजिश का माहौल”
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह परिवार आए दिन बिना किसी ठोस कारण के आपस में झगड़ता है और जब भी कोई पड़ोसी उन्हें समझाने या रोकने का प्रयास करता है, तो उसे डराने-धमकाने के लिए थाने में झूठे प्रार्थना पत्र दे दिए जाते हैं। मोहल्लेवासियों ने आरोप लगाया कि ये लोग आदतन मुकदमेबाजी करने वाले हैं और इनका मुख्य उद्देश्य मोहल्ले में दहशत फैलाकर रखना है। बताया गया कि पूर्व में भी इस परिवार के खिलाफ पुलिस द्वारा धारा 107/116 के तहत कार्रवाई की गई थी, लेकिन पाबंदी की अवधि खत्म होते ही उन्होंने फिर से वही रवैया अपना लिया है।
निष्पक्ष जांच की मांग
वर्तमान में दर्ज एफआईआर संख्या 322/2025 भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 189(2), 74 और 351(2) के तहत दर्ज की गई है। मोहल्लेवासियों का दावा है कि ये धाराएं पूरी तरह निराधार हैं और घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। उन्होंने एसपी से मांग की है कि इस संवेदनशील मामले की जांच किसी वरिष्ठ और निष्पक्ष अधिकारी को सौंपी जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। साथ ही, उन्होंने झूठी एफआईआर दर्ज करवाने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि मोहल्ले की शांति भंग न हो।

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