मृतका शारदा का शव लेने से परिजनों का इनकार, मोर्चरी के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू; दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग
मृतका शारदा का शव लेने से परिजनों का इनकार, मोर्चरी के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू



- पीबीएम अस्पताल किडनी प्रकरण
बीकानेर, 23 जून । बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी (ऑपरेशन से प्रसव) के बाद प्रसूताओं की किडनी फेल होने और मौत का मामला अब बेहद तूल पकड़ चुका है। अस्पताल के मेडिसिन आईसीयू में भर्ती प्रसूता शारदा की मौत के बाद भड़के परिजनों ने सोमवार को शव का पोस्टमार्टम कराने और उसे लेने से साफ इनकार कर दिया। पीड़ित परिवार और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता पीबीएम मोर्चरी के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक लापरवाही बरतने वाले दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और आर्थिक संबल की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शव नहीं उठाया जाएगा।


गौरतलब है कि भीनासर क्षेत्र की निवासी शारदा ने गत 3 जून को पीबीएम अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए एक सुंदर पुत्र को जन्म दिया था। प्रसव के तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद 5 जून को उसे मेडिसिन आईसीयू में शिफ्ट किया गया। गंभीर शारीरिक जटिलताओं और किडनी फेल होने के कारण शारदा पिछले पांच दिनों से वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही थी, और इस दौरान उसकी आंखों की रोशनी भी चली गई थी। आखिरकार, रविवार को उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। सोमवार को शव का पोस्टमार्टम होना था, लेकिन अस्पताल प्रशासन की कथित घोर लापरवाही के खिलाफ परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।


संभागीय आयुक्त और कलेक्टर के साथ 2 घंटे चली वार्ता रही विफल
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार दोपहर बाद संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा और जिला कलेक्टर निशांत जैन ने आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को कलेक्ट्रेट सभागार में वार्ता के लिए आमंत्रित किया। इस उच्च स्तरीय बैठक में नोखा विधायक सुशीला डूडी, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, शहर कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मदनगोपाल मेघवाल, शिमला नायक तथा राजेंद्र मूंड सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए। वार्ता के दौरान नेताओं ने मृतका के आश्रितों को उचित मुआवजा देने, परिवार के एक सदस्य को संविदा पर सरकारी नौकरी देने और दोषी चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई करने सहित 10 सूत्री मांग पत्र रखा। देहात अध्यक्ष बिशनाराम ने बताया कि करीब दो घंटे तक चली यह वार्ता बेनतीजा रही, क्योंकि प्रशासन मुख्य मांगों (मुआवजा और संविदा नौकरी) पर सहमति नहीं जता पाया।
आईसीयू में भर्ती कमला की हालत अत्यंत नाजुक, इमरती को मिली छुट्टी
इस पूरे प्रकरण में पीबीएम अस्पताल के आईसीयू वार्ड में भर्ती एक अन्य प्रसूता कमला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है। गंभीर संक्रमण और किडनी फेल होने के कारण पिछले 12 घंटों में उसका यूरिन आउटपुट मात्र 25 एमएल (ML) ही दर्ज किया गया है। कमला पहले से ही जेस्टेशनल डायबिटीज (मधुमेह) की मरीज है, जिसके कारण मेडिकल बोर्ड की विशेष टीम लगातार उसकी मॉनिटरिंग कर रही है। राहत की बात यह है कि आईसीयू में भर्ती तीसरी प्रसूता इमरती की सेहत में तेजी से सुधार हुआ है। पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. घीया ने बताया कि इमरती की हालत अब पूरी तरह नियंत्रण में है और मंगलवार को उसे अस्पताल से डिस्चार्ज (छुट्टी) कर दिया जाएगा।
नकली दवा या ओटी-आईसीयू में घातक संक्रमण का आरोप; अब तक दो मौतें
अस्पताल में अब तक दो प्रसूताओं (प्रीति और शारदा) की मौत हो चुकी है। मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और एडवोकेट सीताराम नायक ने आरोप लगाया कि पहली मृतका प्रीति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद भी पुलिस प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। नायक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि या तो प्रसूताओं को सिजेरियन के दौरान दी गई दवाइयां घटिया या नकली थीं, या फिर अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) से लेकर आईसीयू वार्ड तक कोई घातक बैक्टीरियल संक्रमण फैला हुआ है, जिसकी चपेट में आने से प्रसूताओं की किडनियां फेल हो रही हैं। एसपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सुरेंद्र वर्मा और पुलिस अधिकारियों ने भी प्रदर्शनकारियों से समझाइश का प्रयास किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक आंदोलनकारी अपनी मांगों पर अडिग हैं।


