श्री रामकथा अमृतोत्सव में श्रीराम-जानकी विवाह पर मांगलिक भजनों, गीतों व नृत्यों की धूम

श्री रामकथा अमृतोत्सव में श्रीराम-जानकी विवाह पर मांगलिक भजनों, गीतों व नृत्यों की धूम
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बीकानेर, 20 मई। सीताराम गेट के भीतर स्थित ऐतिहासिक सीताराम भवन में आयोजित ‘श्री रामकथा अमृतोत्सव’ के पांचवें दिन बुधवार को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम और माता जानकी के पावन विवाह (परिणय उत्सव) का प्रसंग अत्यंत धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान सचेतन झांकियां, मांगलिक वैवाहिक गीत और महिलाओं के मनमोहक नृत्यों की चौतरफा धूम रही।

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विवाह प्रसंग की दिव्य झांकियों में विभिन्न देवी-देवताओं और पात्रों की भूमिका कथा की मुख्य आयोजनकर्ता श्रीमती पुष्पा देवी सोमानी (धर्मपत्नी स्वर्गीय श्री सीताराम सोमानी) के परिजनों द्वारा बड़े ही चाव से निभाई गई।

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परिणय संस्कार की महत्ता को जानें: पंडित पुरुषोत्तम व्यास ‘मीमांसक’

व्यासपीठ से सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित पुरुषोत्तम व्यास ‘मीमांसक’ ने रामचरितमानस के बालकांड से माता सीता द्वारा की गई देवी पार्वती की स्तुति और गौरी वंदना “जय-जय गिरिवर राज किशोरी, जय महेश मुख चंद चकोरी” का संगीतमय गान करते हुए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कथाव्यास ने विवाह की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी परिणय (विवाह) संस्कार को मात्र एक औपचारिकता या मजाक में न ले। विवाह सनातन संस्कृति के 16 संस्कारों में से एक अत्यंत पवित्र बंधन है। इसके धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक नियम-कायदों का निष्ठापूर्वक पालन करने से ही दांपत्य जीवन सुखमय, दीर्घायु और अटूट रहता है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि जिन कन्याओं को सुयोग्य वर और अच्छे घर की अभिलाषा है, वे यदि रामचरितमानस में वर्णित माता सीता द्वारा की गई इस गौरी वंदना का नियमित पाठ करें, तो उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।

चौपाइयों और भजनों पर झूमे श्रद्धालु

पंडित ‘मीमांसक’ ने माता जानकी के अप्रतिम सौंदर्य और स्वयंवर प्रसंग की व्याख्या करते हुए मानस की प्रसिद्ध चौपाइयों— “सिय सुंदरता बरनि न जाई, लघु मति बहुत मनोहर ताई…” और “सीय राम मय सब जग जानी, करहु प्रनाम जोरि जुग पानी…” का श्रवण कराया। इसके साथ ही पूरा पंडाल “मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी” के सामूहिक संकीर्तन और महामंत्र “ॐ श्री रामचन्द्र सीता हितायै नमः” के जाप से गुंजायमान हो उठा। कथावाचक ने बताया कि पौराणिक वैदिक नियमों और रामचरितमानस की चमत्कारी चौपाइयों के गायन से पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम प्रगाढ़ होता है, अविवाहितों के विवाह के योग प्रबल होते हैं तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

राजस्थानी और मैथिली गीतों की गूंज
श्रीराम-जानकी विवाह के इस शुभ अवसर पर पंडाल में उपस्थित महिला श्रद्धालुओं ने गणगौर, पारंपरिक विवाह के राजस्थानी, मैथिली और हिंदी के सुमधुर वैवाहिक गीतों (गाली व बधाई गीत) पर सुर से सुर मिलाए और जमकर डांडिया व पारंपरिक नृत्य किया। आयोजन समिति ने बताया कि यह दिव्य रामकथा आगामी 24 मई तक नियमित रूप से प्रतिदिन दो सत्रों में (दोपहर 12:30 बजे से दोपहर 3:15 बजे तक तथा शाम 4:00 बजे से रात्रि 7:00 बजे तक) सीताराम भवन में जारी रहेगी।

 

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