ज्ञानशाला दिवस- बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए संस्कार और शिक्षा का पर्व
ज्ञानशाला दिवस- बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए संस्कार और शिक्षा का पर्व


गंगाशहर , 30 अगस्त। साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी के सान्निध्य में ज्ञानशाला दिवस का भव्य आयोजन तेरापंथी सभा द्वारा किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ज्ञानार्थियों द्वारा प्रस्तुत ज्ञानशाला गीत से हुई, जिससे समरसता और उत्साह का माहौल बना। इस अवसर पर श्रीमती मुक्तामणी सामसुखा ने अतिथियों और सभी उपस्थितजनों का हार्दिक स्वागत किया।


साध्वीश्री त्रिशलाकुमारी जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि इन बच्चों में से कई भविष्य में साधु-साध्वी या प्रशासन व राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे बच्चों को भौतिक वस्तुएं देना छोड़कर संस्कारों की अच्छी शिक्षा अवश्य दें, क्योंकि यही बच्चों के चरित्र और जीवन को तराशता है।


साध्वीश्री कल्पयशा ने बच्चों की तुलना कोरे कागज से की और बताया कि वे उन्हें जैसा बनाएंगे वैसा ही वे होंगे। उन्होंने कहा कि ज्ञानशाला बच्चों को सम्यक ज्ञान प्रदान करती है, जो पुस्तकीय ज्ञान से अलग है। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को ज्ञानशाला जरूर भेजें ताकि वे सच्चे जीवन का उद्देश्य समझ सकें।
महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती प्रेम बोथरा ने समाज के हर बच्चे के लिए ज्ञानशाला से जुड़ने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और इसे समाज के विकास का आधार बताया। ते.यु.प. के अध्यक्ष देवेन्द्र डागा ने उत्कृष्ट ज्ञानशाला बनाने के प्रयासों को प्रोत्साहित करते हुए सभी समाजिक व शैक्षणिक कार्यकर्ताओं से सहयोग मांगा।
कार्यक्रम में बच्चों ने गीतिका, नशा मुक्ति पर नाटिका और एंक्शन सॉन्ग जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोहा। आंचलिक संयोजक रतनलाल छलाणी ने सभी बच्चों की जमकर प्रशंसा की। वार्षिक रिपोर्ट ज्ञानशाला प्रभारी चैतन्य रांका द्वारा प्रस्तुत की गई, जिसमें ज्ञानशाला की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी गई। सभा मंत्री जतनलाल संचेती ने ज्ञानशाला को 500 बच्चों तक पहुंचाने और 50 प्रशिक्षकों को जोड़ने का लक्ष्य रखा।
सभी गतिविधियों का सफल संचालन श्रीमती सुनीता पुगलिया ने किया, जबकि आभार ज्ञापन श्रीमती श्रीया गुलगुलिया ने प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम ने समाज में शिक्षा और संस्कार के महत्व को स्पष्ट करते हुए बच्चों के उज्जवल भविष्य की आशा को मजबूत किया। ज्ञानशाला की उन्नति को देश की उन्नति से जोड़ा गया, जिससे यह कार्यक्रम बेहद सफल और प्रेरणादायक साबित हुआ।
