रक्षाबंधन के दिन सत्य सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प लें- साध्वी मुक्तांजना श्रीजी

रक्षाबंधन के दिन सत्य सनातन धर्म की रक्षा का संकल्प लें- साध्वी मुक्तांजना श्रीजी
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बीकानेर , 28 अगस्त। बीकानेर के रांगड़ी चौक स्थित सुगनजी महाराज के उपासरे में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान सुरंजनाश्रीजी म.सा. की शिष्या साध्वीश्री मुक्तांजनाश्रीजी ने रक्षाबंधन के पावन पर्व के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।

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जैन परंपरा में रक्षाबंधन का ऐतिहासिक संदर्भ

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साध्वी मुक्तांजनाश्रीजी ने कहा कि भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ जैन धर्म में रक्षाबंधन अहिंसा, धर्म-रक्षा और संत-सम्मान के प्रतीक के रूप में अनादिकाल से मनाया जाता रहा है। उन्होंने इस पर्व से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया हस्तिनापुर में 700 मुनियों पर आए उपसर्ग (संकट) का प्रसंग। अवधिज्ञानी महामुनि विष्णु कुमार जी का हस्तिनापुर पहुंचना और मुनियों के कष्टों का निवारण।

राजा बलि से तीन पग भूमि दान मांगने का वामन रूप प्रसंग।

मुनियों की रक्षा की इस ऐतिहासिक घटना की स्मृति में श्रद्धालुओं द्वारा एक-दूसरे की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने की परंपरा शुरू हुई, जिसे मुनि रक्षा दिवस या ‘जैन रक्षाबंधन’ के रूप में जाना जाता है।

धर्म और संतों की रक्षा का लें संकल्प

साध्वीश्री ने बताया कि रक्षाबंधन का दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि इस दिन:

विकारों से रक्षा: काम, क्रोध, लोभ और मोह जैसे कषायों से स्वयं की रक्षा का संकल्प लें।

धर्म व संत सुरक्षा: सत्य सनातन धर्म, देव, गुरु और धर्म के प्रति पूर्ण समर्पण भाव रखें।

स्वधर्मी रक्षा: जिन शासन के समर्पित मुनि-साध्वीवृंद, जिनालयों तथा अपने स्वधर्मी बंधुओं की रक्षा और सेवा के लिए सदैव तत्पर रहें।