संकट में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता प्रशासनिक संवेदनहीनता का शिकार

संकट में अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता प्रशासनिक संवेदनहीनता का शिकार
STBA 5 JUNE 2026
C M MUDRA MEMORIAL HOSPITAL
quicjZaps 15 sept 2025

एशिया कप से पहले पैरालंपियन श्याम सुंदर स्वामी को नौकरी से निकाला, परिवार पर टूटा आर्थिक दुखों का पहाड़

indication
L.C.Baid Childrens Hospiatl

बीकानेर, 18 फरवरी। एक ओर सरकारें ‘खेलो इंडिया’ और ‘पद्म’ पुरस्कारों के जरिए खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का दावा करती हैं, वहीं दूसरी ओर देश का गौरव बढ़ाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को प्रशासनिक संवेदनहीनता का शिकार होना पड़ा है। दो बार के पैरालंपियन और विश्व विजेता पैरा आर्चर श्याम सुंदर स्वामी को बिना किसी लिखित आदेश के नौकरी से हटा दिया गया है। पिछले 5 महीनों से वेतन न मिलने और अचानक रोजगार छिन जाने से यह चैंपियन खिलाड़ी आज दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर है।

pop ronak
M ranka bhajanlal cm

बीकानेर के रहने वाले श्याम सुंदर स्वामी का संघर्ष केवल मैदान तक सीमित नहीं रहा है। उनके पिता आज भी ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करते हैं। ऐसे में सरकारी नौकरी ही उनके परिवार का एकमात्र ठोस सहारा थी, जिसे अब छीन लिया गया है।

एशिया कप की तैयारी या आर्थिक संघर्ष?
श्याम सुंदर स्वामी को आगामी मार्च महीने में एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। जब देश उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीद लगाए बैठा है, तब वे खुद को “पूरी तरह टूटा हुआ” महसूस कर रहे हैं।

मानसिक तनाव: स्वामी का कहना है कि जब परिवार के पास बुनियादी जरूरतों के लिए पैसे न हों, तो कोई भी खिलाड़ी एकाग्रता के साथ खेल पर ध्यान नहीं दे सकता।

बगैर सूचना कार्रवाई: सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि उन्हें नौकरी से हटाने के लिए कोई आधिकारिक नोटिस या लिखित आदेश नहीं दिया गया, जिससे वे कानूनी गुहार लगाने की स्थिति में भी नहीं हैं।

पदक विजेताओं की अनदेखी पर सवाल
राजस्थान सरकार की नीतियों के तहत अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं को आउट-ऑफ-टर्न नियुक्तियां और भारी अनुदान देने के वादे किए जाते हैं। लेकिन श्याम सुंदर स्वामी का मामला इन दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। एक खिलाड़ी जो विश्व स्तर पर तिरंगा लहरा चुका है, उसे दर-दर भटकने को मजबूर करना खेल प्रबंधन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

खिलाड़ी का दर्द: “मेरा लक्ष्य देश के लिए पदक जीतना था, लेकिन आज स्थिति यह है कि मुझे नहीं पता कल घर का खर्च कैसे चलेगा। बिना किसी गलती के नौकरी से निकाल देना मुझे मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ चुका है।”

न्याय की उम्मीद में बीकानेर का लाल
श्याम सुंदर स्वामी की इस स्थिति ने खेल प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया पर भी उनके समर्थन में आवाजें उठने लगी हैं। मांग की जा रही है कि खेल मंत्री और मुख्यमंत्री इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें, ताकि एक होनहार खिलाड़ी का करियर और परिवार बर्बाद होने से बच सके और वह पूरे जोश के साथ एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व कर सके।

sjps

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *