पारायण फाउंडेशन द्वारा साहित्यकार निर्मल शर्मा की दो कृतियों चंद्र-सविता और जद बोल्यौ निट्टू का लोकार्पण
पारायण फाउंडेशन द्वारा साहित्यकार निर्मल शर्मा की दो कृतियों चंद्र-सविता और जद बोल्यौ निट्टू का लोकार्पण

बीकानेर, 02 अक्टूबर । पारायण फाउंडेशन के तत्वावधान में शुक्रवार को पवनपुरी स्थित सामुदायिक भवन में वरिष्ठ साहित्यकार एवं इंजीनियर निर्मल कुमार शर्मा की दो नवीन कृतियों का गरिमामय लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। गायत्री प्रकाशन से प्रकाशित हिंदी कविता संग्रह ‘चंद्र-सविता’ एवं राजस्थानी कविता संग्रह ‘जद बोल्यौ निट्टू’ का लोकार्पण लालेश्वर महादेव मंदिर मठ के अधिष्ठाता स्वामी विमर्शानंद गिरि जी महाराज, वरिष्ठ साहित्यकार मधु आचार्य ‘आशावादी’, डॉ. मदन सैनी तथा सत्यदीप द्वारा किया गया।


सूक्ष्म संवेदना और विचारों का तालमेल ही कालजयी कविता: स्वामी विमर्शानंद
समारोह की अध्यक्षता करते हुए स्वामी विमर्शानंद गिरि जी महाराज ने कहा कि कालजयी कविता वही होती है, जिसकी संवेदना सूक्ष्म हो। कवि अपनी कल्पना और विचारों के सुंदर तालमेल से कविता की रचना करता है। निर्मल शर्मा की कविताएं पाठक को अपने भावों में तन्मय कर देने वाली हैं।


विसंगतियो पर अचूक प्रहार करती हैं निर्मल शर्मा की रचनाएं
मुख्य अतिथियों एवं आलोचकों ने कृतियों पर अपने विचार व्यक्त किए
मधु आचार्य ‘आशावादी’: उन्होंने निर्मल शर्मा को करुणा का कवि बताते हुए कहा कि बिना किसी आडंबर के उन्होंने समाज की विसंगतियों पर प्रहार करने के लिए कविता रूपी अचूक औजार का प्रयोग किया है।
डॉ. मदन सैनी: वरिष्ठ कथाकार ने कहा कि सर्वोत्तम भावों की सर्वोत्तम अभिव्यक्ति ही कविता की पहली और आखिरी शर्त है। निर्मल शर्मा का लेखन संवेदनाओं की जीवंत अभिव्यक्ति है।
सत्यदीप: वरिष्ठ कवि व अनुवादक ने कहा कि यथार्थ से अध्यात्म की यात्रा का आनंद देने वाली इन कविताओं की भाषा और व्यंजना अत्यंत प्रभावी है।
कवि ने साझा की रचना प्रक्रिया
इस अवसर पर कवि निर्मल शर्मा ने अपनी काव्य यात्रा और रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब मन की अनुभूतियां हिलोरे मारती हैं, तब शब्दों का सृजन होता है। कविता का मुख्य ध्येय किसी महत्वाकांक्षा से न होकर मन के उद्गारों को पाठकों तक पहुंचाना है। उन्होंने अपनी दोनों कृतियों से कुछ चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया।
वरिष्ठ साहित्यकारों व गणमान्यजनों की रही मौजूदगी
समारोह के प्रारंभ में संजय आचार्य ‘वरुण’ ने कवि का परिचय देते हुए उन्हें शब्दों का बेहतरीन इंजीनियर बताया। अतिथियों का स्वागत चंद्रकांत शर्मा ने किया तथा आभार आर.के. शर्मा द्वारा व्यक्त किया गया। मंच का कुशल संचालन हरीश बी. शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में मालचंद तिवाड़ी, कमल रंगा, सुलक्षणा दत्ता राजवंशी, डॉ. चंचला पाठक, डॉ. ओम कुवेरा, जितेंद्र निशात, राजाराम स्वर्णकार, विपिन पुरोहित, अमित गोस्वामी, कासिम बीकानेरी, कासिम अली सहित शहर के अनेक गणमान्य साहित्यकार, रंगकर्मी और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
