बीकानेर पीबीएम से बड़ी और राहत भरी खबर , डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग

बीकानेर पीबीएम से बड़ी और राहत भरी खबर , डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग
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  • मौत को मात देकर लौट रहीं मां; 6 में से 4 प्रसूताओं की हालत में बड़ा सुधार, 2 को दो दिन में मिलेगी छुट्टी

बीकानेर, 13 जून। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में गंभीर स्थिति में भर्ती प्रसूताओं के स्वास्थ्य को लेकर पिछले एक सप्ताह से जारी भारी चिंता और तनाव के बीच शनिवार को एक बेहद राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। अस्पताल के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संयुक्त टीम की दिन-रात की अथक मेहनत आखिरकार रंग लाई है। आईसीयू (ICU) में उपचाराधीन छह गंभीर प्रसूताओं में से चार के स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। इनमें से दो प्रसूताओं को आगामी दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी (डिस्चार्ज) दिए जाने की पूरी संभावना है।

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कुपोषण, निर्जलीकरण और खून की कमी से जूझ रही थीं प्रसूताएं

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पीबीएम अस्पताल प्रशासन द्वारा जारी चिकित्सकीय विवरण के अनुसार, अस्पताल में भर्ती प्रसव योग्य ये महिलाएं पहले से ही कई गंभीर और ‘हाई रिस्क फैक्टर्स’ (उच्च जोखिम वाले कारकों) से पीड़ित थीं। कुछ प्रसूताओं के शरीर में खून की अत्यधिक कमी थी और उनका हीमोग्लोबिन स्तर 7 g /d L से भी कम दर्ज किया गया था। इसके साथ ही, ये महिलाएं उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर), गंभीर कुपोषण और डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) की शिकार भी थीं, जिसके कारण प्रसव के बाद उनकी स्थिति जानलेवा हो गई थी।

दो वेंटिलेटर पर, चार रिकवरी की राह पर

वर्तमान में ये सभी प्रसूताएं गहन चिकित्सा इकाई में उपचाराधीन हैं। चिकित्सा बुलेटिन के अनुसार दो प्रसूताओं की स्थिति में सबसे तेजी से सुधार हुआ है, जिन्हें अगले दो दिनों में डिस्चार्ज करने की तैयारी है। दो अन्य प्रसूताओं की सामान्य स्थिति भी अब पूरी तरह स्थिर है और वे तेजी से रिकवरी की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इन्हें भी आगामी एक सप्ताह में पूर्णतः स्वस्थ होने पर घर भेजा जा सकता है। शेष दो प्रसूताओं की स्थिति अब भी अत्यंत गंभीर बनी हुई है और वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं, लेकिन डॉक्टरों की टीम उनकी जान बचाने के लिए चौबीसों घंटे मुस्तैद है।

छह विभागों के दिग्गजों की टीम ने संभाला मोर्चा

इन प्रसूताओं को मौत के मुंह से बाहर निकालने के लिए पीबीएम अस्पताल के छह प्रमुख विभागों— मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (गाइनेकोलॉजी), नेफ्रोलॉजी, एनेस्थीसिया, पल्मोनरी मेडिसिन तथा न्यूरोलॉजी— की संयुक्त टीम दिन-रात एक किए हुए है। इसके साथ ही रेजिडेंट डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर्स और पैरामेडिकल स्टाफ भी पूरी प्रतिबद्धता के साथ राउंड द क्लॉक सेवाएं दे रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र कुमार के मार्गदर्शन तथा कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. परमेंद्र सिरोही के निर्देशन में गठित इस विशेष चिकित्सकीय टास्क फोर्स में अतिरिक्त प्राचार्य डॉ. रेखा आचार्य एवं डॉ. नीति शर्मा, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष खजोटिया, डॉ. सुमन बुडानिया, प्रख्यात नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र फलोदिया, न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. खेताराम शर्मा, निश्चेतन विभाग से डॉ. विशाल और श्वसन रोग विभाग के डॉ. रवि सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ शामिल हैं, जो इन प्रसूताओं की बेहतर रिकवरी और सुरक्षित जीवन के लिए अपने उच्चतम स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।

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