शिक्षा निदेशालय में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने हेतु शिक्षा निदेशक को सौंपा ज्ञापन
कमल नारायण आचार्य


बीकानेर, 20 मई। शिक्षा विभागीय कर्मचारी संघ, राजस्थान (बीकानेर) की ओर से बुधवार को शिक्षा निदेशक को एक ज्ञापन सौंपकर निदेशालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं को दूर करने और कर्मचारियों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने की पुरजोर मांग की गई। संगठन के प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने शिक्षा निदेशक से शिष्टाचार मुलाकात कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया।


निदेशक महोदय को सौंपे गए ज्ञापन में प्रदेशाध्यक्ष कमल नारायण आचार्य ने बताया कि कार्यालय में आधारभूत सुविधाओं की कमी को लेकर संगठन द्वारा पूर्व में भी कई बार लिखित में अवगत कराया जा चुका है, लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने गत दिनों का उल्लेख करते हुए कहा कि 27 अप्रैल 2026 को कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा शिक्षा निदेशालय का औचक निरीक्षण किया गया था।


इस निरीक्षण के दौरान केवल खानापूर्ति करते हुए सिर्फ उपस्थिति रजिस्टरों पर ध्यान केंद्रित किया गया और कार्मिकों को नोटिस जारी कर दिए गए, जो कि न्यायसंगत नहीं है। असलियत यह है कि निदेशालय में काम की भारी अधिकता होने के बावजूद कार्मिक देर रात्रि तक रुककर पूर्ण निष्ठा के साथ शासकीय कार्यों को निपटाते हैं।
बाजार से पानी खरीद कर पीने को मजबूर हैं कार्मिक
आचार्य ने निदेशालय की जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में कर्मचारियों को पीने के ठंडे पानी से लेकर कूलरों में पानी भरने तक की व्यवस्था स्वयं के स्तर पर करनी पड़ रही है। हालत यह है कि कार्मिक बाजार से पानी खरीद कर पीने को मजबूर हैं। जबकि संगठन के विशेष निवेदन पर पूर्व में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा सामाजिक सरोकार के तहत कार्यालय में वाटर कूलर मशीनों की व्यवस्था करवाई गई थी, परंतु उचित रख-रखाव और पानी की समुचित सप्लाई न होने के कारण यह व्यवस्था ठप पड़ी है। इस अव्यवस्था की वजह से न केवल स्थानीय कर्मचारी, बल्कि दूर-दराज से आने वाले आगंतुकों और अभ्यार्थियों को भी पीने के पानी के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बजट स्वीकृत होने के बाद भी सेंटर कूलिंग व सोलर प्रोजेक्ट अटके
ज्ञापन के माध्यम से यह गंभीर मुद्दा भी उठाया गया कि विभाग के पास सेंटर कूलिंग सिस्टम का बजट लंबे समय से उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासनिक शिथिलता के कारण इस पर अब तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। इसके साथ ही निदेशालय परिसर में सोलर एनर्जी सिस्टम भी पूरी तरह से स्थापित नहीं किया जा सका है, जिसके चलते विभाग को हर महीने लाखों रुपये का भारी-भरकम बिजली बिल चुकाना पड़ रहा है। यदि इन स्वीकृत पैसों का समय पर सदुपयोग कर सोलर प्रोजेक्ट पूरा किया जाए, तो बिजली का बिल कम होगा और पानी की खपत में भी सुधार आएगा। वर्तमान में पानी की भारी किल्लत के कारण परिसर में लगे पेड़-पौधों और हरियाली को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।
कर्मचारी संघ ने रोष जताते हुए कहा कि शिक्षा निदेशालय राज्य स्तर (स्टेट लेवल) का एक प्रतिष्ठित और सर्वोच्च कार्यालय है, इसके बावजूद यहां धरातल पर कर्मचारियों को मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं। प्रदेशाध्यक्ष ने शिक्षा निदेशक से मांग की है कि इन तमाम व्यवस्थाओं में अविलंब सुधार कर कार्मिकों के हित में उचित और त्वरित कदम उठाए जाएं।


