राजराजेश्वरी नगर में नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान सानन्द संपन्न

राजराजेश्वरी नगर में नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान सानन्द संपन्न
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राजराजेश्वरी नगर, 1 अक्टूबर । आचार्यश्री महाश्रमणजी की सुशिष्या साध्वी श्री पुण्ययशाजी के सान्निध्य में नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान (नवरात्रि) सानन्द संपन्न हुआ। साध्वी श्री जी ने अपने प्रवचन में इस अनुष्ठान को आरोग्य, सौभाग्य तथा आध्यात्मिक लाभ देने वाला और अक्षय शक्ति का स्रोत बताया।
आध्यात्मिक ऊर्जा और तपस्या का महत्व
साध्वी श्री पुण्ययशाजी ने अनुष्ठान की महत्ता समझाते हुए कहा कि मंत्र की ध्वनि तरंगों के प्रकंपनों के द्वारा अंतःकरण में ऊर्जा का विस्फोट होता है, जिससे हमारी आध्यात्मिक शक्तियाँ जागृत होती हैं। इन शक्तियों के जागृत होने पर शरीर के विभिन्न चेतना केंद्र शक्तिशाली और ज्योतिर्मय हो जाते हैं, और रोग, शोक, चिंता आदि भावनात्मक दोषों को नष्ट कर देते हैं। साध्वी श्री जी ने आगे कहा कि अनुष्ठान के साथ जब तप जुड़ जाता है, तो वह और अधिक शक्तिशाली बन जाता है।

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तप की अनुमोदना
साध्वियों की प्रेरणा से अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने अनुष्ठान के साथ-साथ एकासन, आयम्बिल, उपवास आदि तपस्याएँ कीं। इस अवसर पर श्रीमती सीमा सहलोत ने साध्वीश्री से ‘नी’ की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। साध्वी विनितयशाजी, साध्वी वर्धमानयशाजी, और साध्वी बोधिप्रभाजी ने गीतिका के माध्यम से तप की अनुमोदना की। ऋद्धि और नवमी ने भी अपनी बुआ की तपस्या की अनुमोदना एक सुमधुर गीतिका से की।

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तेरापंथ सभाध्यक्ष राकेश छाजेड़ ने तपस्विनी बहन का अभिनंदन करते हुए तप की महिमा को उजागर किया। कई भाई-बहनों ने बेले और तेले की भेंट से तप की अनुमोदना की। इस अवसर पर ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं, तनीषा सहलोत और श्रीमती पिस्ता पितलिया ने भी अपने भाव व्यक्त किए। पूरे कार्यक्रम का संचालन विपुलानी पितलिया ने कुशलता से किया।

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