मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर विवाद में विपक्ष के हमले और आयोग की स्थिति

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर विवाद में विपक्ष के हमले और आयोग की स्थिति
STBA 5 JUNE 2026
quicjZaps 15 sept 2025
खमत खामणा
राजस्थान सी एम देशनोक विजिट

नई दिल्ली, 23 सितंबर। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली को लेकर देश में एक नया राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी—के बीच आंतरिक मतभेदों और आपत्तियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद समूचा विपक्ष आक्रामक हो गया है।

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विवाद की मुख्य वजह
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) और डेटा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के भीतर कम से कम 14 बार अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई आदेश और नीतिगत बदलाव दोनों चुनाव आयुक्तों को अंधेरे में रखकर या उनकी जानकारी के बिना लागू किए गए थे।

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इन आपत्तियों में प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं:

फॉर्म 6 में अनाधिकृत बदलाव: नए मतदाताओं के पंजीकरण फॉर्म (Form 6) में आवेदकों से उनके माता-पिता या दादा-दादी के पुराने SIR में दर्ज नाम की जानकारी मांगने का सवाल जोड़ा गया, जिसे आयुक्त संधू ने “अवैध और उत्पीड़नकारी” बताया।

वोटर डेटा का केंद्रीयकरण: ‘ERONet’ और डिजिटल प्लेटफॉर्म के डेटा एक्सेस को केंद्रीय स्तर पर सीमित करने तथा आईटी निगरानी की परतों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए गए।

नामों को हटाने व जोड़ने की प्रक्रिया: पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु समेत कई राज्यों में लाखों मतदाताओं के नाम काटे जाने और अपील दाखिल करने के अधिकार क्षेत्र पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं।

विपक्ष के प्रमुख नेताओं के आरोप एवं मांगें
राहुल गांधी (कांग्रेस): लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर हमला बोलते हुए कहा कि ‘वोट चोरी’ देश के मतदाताओं और संविधान पर सीधा हमला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

ममता बनर्जी (तृणमूल कांग्रेस): पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रिपोर्ट को “चौंकाने वाला” बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी और तत्काल निष्कासन की मांग की। साथ ही उन्होंने बंगाल में पुरानी मतदाता सूची के आधार पर फिर से चुनाव कराने की मांग रखी।

तेजस्वी यादव (राजद): राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ पहुँचाने के लिए दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमों में फेरबदल से चुनावी नतीजों को चुनौती देने की प्रक्रिया को कमजोर किया गया है।

एम.के. स्टालिन (द्रमुक): तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने SIR प्रक्रिया के दौरान तमिलनाडु और अन्य राज्यों से लाखों पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने का विरोध करते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

अखिलेश यादव (सपा): समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में अंदरूनी आपत्तियां दर्ज होना लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) से स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की अपील की।

उद्धव ठाकरे एवं अरविंद केजरीवाल: उद्धव ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई व महाराष्ट्र में मतपत्रों (Ballot Papers) से दोबारा चुनाव की मांग की, जबकि आप (AAP) के अरविंद केजरीवाल ने इस पूरी SIR प्रक्रिया को “अवैध” करार दिया।

चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच निर्वाचन आयोग (ECI) ने प्रेस बयान जारी कर सफाई दी है:

सर्वसम्मत निर्णय: आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR और मतदाता सूची सुधार से जुड़े सभी अंतिम निर्णय तीन सदस्यीय आयोग (CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों) द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा: आयोग के अनुसार, किसी नीति के मसौदे पर अधिकारियों या आयुक्तों द्वारा अलग-अलग सुझाव, आपत्तियां या रचनात्मक टिप्पणियां देना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे “असंतोष” या “विवाद” नहीं कहा जा सकता।

डेटा सुरक्षा: आयोग ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और ‘ECINet’ पूरी तरह सुरक्षित हैं और सभी कानूनी मानकों के तहत पारदर्शी तरीके से कार्य कर रहे हैं।